घटना वर्ष 2008 की है। युवक का शव जहांगीराबाद क्षेत्र के नेवादा पुल के पास मिला था। कोर्ट ने एक आरोपी को संदेह के लाभ में दोष मुक्त करार दिया है।
प्रभारी शासकीय अधिवक्ता अमरेश विक्रम सिंह व अधिवक्ता रनवीर सिंह ने बताया कि जिला लखनऊ नाका हिंडोला इलाके में फतेहगंज निवासी व्यापारी रविन्द्र कुमार गुप्ता का पुत्र श्याम तीन नवंबर 2008 को दोस्तों से मिलने की बात कहकर घर से निकला था।
शाम तक वापस नहीं लौटा तो परिवारीजनों ने तलाश शुरू की। नाका हिंडोला पुलिस के जरिए श्याम कुमार की बाइक बाराबंकी के फतेहपुर क्षेत्र में लावारिस खड़ी होने की सूचना मिली। दूसरे दिन श्याम कुमार का शव जहांगीराबाद क्षेत्र में नेवादा पुल के पास पाया गया।
घटना की रिपोर्ट मृतक के पिता रविन्द्र कुमार गुप्ता ने जहांगीराबाद में अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई। विवेचना के दौरान जानकीपुरम निवासी पवन दुबे, थाना टिकैतनगर के ग्राम खुटौली निवासी अविनाश त्रिपाठी व जिला मऊ में थाना रानीपुर के ग्राम खुरहट निवासी प्रवीण कुमार की संलिप्तता पाई गई।
तत्कालीन एसओ गाजीपुर लखनऊ अरुण कुमार द्विवेदी को मामले की विवेचना सौंपी गई। पुलिस ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र नेता एवं आरोपी पवन दुबे व प्रवीण की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त रिवाल्वर बरामद किया।
गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की बहस सुनने के पश्चात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिजेन्द्र कुमार शैलत ने आरोपी पवन दुबे को हत्या, लूट व साक्ष्य छिपाने का दोषी पाते हुए उम्र कैद और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
वहीं आरोपी प्रवीण कुमार को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त करार दिया है। तीसरे आरोपी अविनाश त्रिपाठी की फरारी के चलते उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है।