पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भले ही जहरीली शराब पीकर मरने वालों के मौत के कारणों की स्पष्ट पुष्टि न कर पाई हो किंतु मृतकों के परिवारीजन और गांव वालों की मानें तो सभी मौतों का कारण जहरीली शराब है। जिला प्रशासन अभी तक हुई पंद्रह मौतों में सिर्फ तीन का ही कारण जहरीली शराब मान रहा है और दस लोगों को ही मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे में अन्य मृतकों के परिवारीजनों के सामने संकट बढ़ना तय माना जा रहा है।
अमर उजाला टीम ने रविवार को मृतकों के परिवारीजनों से लेकर गांव वालों से बात की तो सभी अवैध शराब को कोसते नजर आए। पांच दिन बाद भी मृतकों के गांवों में मातम के बीच जहरीली शराब की चर्चा थम नहीं रही है। चाहे नेताओं की आमद हो या फिर अफसरों की मीडिया वालों से बातचीत हो सबके सामने पहले लोग घबराते है पर बाद में नशे की बात खुलकर करने लगते है। जिला प्रशासन अभी तक चाहे जो बहाने बनाए पर पीड़ितों को कोई सरकारी मदद नहीं पहुंचा पाया है। इतना ही नहीं जिन मृतकों का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है उन्हें सरकारी मदद मिलना भी संभव नहीं है।
मालूम हो कि देवा कोतवाली क्षेत्र में दस जनवरी को जहरीली शराब पीने से हुई ताबड़तोड़ मौतों से पूरे क्षेत्र में मातम और दहशत का माहौल है। ढिंढौरा, मुनियापुरवा, सलारपुर से लेकर रीवा रतनपुर, मोहम्मदपुर में मृतकों के घर की हालात बेहद खराब है। किसी के घर में सिर्फ बच्चे ही बचे हैं तो कहीं महिला के सहारे ही बच्चों की रोजी रोटी का जुगाड़ करना टेढ़ी खीर हो गया है। सभी दलों के नेता भले ही एक के बाद एक यहां अपनी संवेदनशीलता दिखाने आ रहे हो पर सांसद प्रियंका सिंह रावत को छोड़कर किसी ने आर्थिक मदद नहीं की है।