जिले में कानून व्यवस्था की हालत बद से बदतर हो चुकी है। पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के चलते जिले में आए दिन लॉ एंड आर्डर की व्यवस्था बिगड़ रही है। अफसरों की बे-अंदाजी से जहां आम नागरिक पिस रहा है। वहीं पुलिसिया उत्पीड़न से बेगुनाहों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
केस एक-
कोठी थाने में जिंदा जलाई गई महिला
कोठी थाने में पुलिस द्वारा अवैध हिरासत में बैठाए गए अपने पति को 6 जुलाई को छुड़ाने पहुंची एक महिला को वहां जिंदा जला दिया गया था। महिला ने मृत्यु से पूर्व डीएम के सामने बयान दिया था कि थाने के तत्कालीन एसओ रायसाहब यादव व एसआई अखिलेश राय ने उसे जलाकर मा है। इसके बाद भी यहां की पुलिस ने इन आरोपी पुलिस कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। आखिरकार आरोपी एसओ सत्ता के करीबी होने का फायदा उठाते हुए मामले को सीबीसीआईडी के सुपुर्द करवा दिया और आज तक कुछ भी नहीं हुआ।
केस दो-
पुलिस की लापरवाही से सिद्धौर में भड़का दंगा
जिले की पुलिस की लापरवाही से सिद्धौर कस्बे में दो पक्षों के बीच 28 अगस्त को विवाद हो गया था। यहां पर हुई मारपीट व आगजनी में जहां दर्जनों लोग घायल हुए थे वहीं कस्बे में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए थे। मामले के एक सप्ताह बीतने को है लेकिन इसके बावजूद यहां पर अभी तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। मंगलवार को भी सिद्धौर में आगजनी होने से एक बार फिर मामला गरमाने लगा है।
केस तीन-
हिरासत में युवक की मौत, ग्रामीणों ने फूंक दी चौकी
30 अगस्त की शाम देवा कोतवाली में पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत हो गई थी। मामले में पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती जिसके चलते आम जनता भड़क उठी और फिर पुलिस चौकी ही फूंक डाली। अब इसके बाद पुलिस ने कई गांवों के लोगों पर इतना कहर बरपाया है कि वह लोग अपने गांव व घर छोड़कर ही भाग गए है।
जिले में होने वाले हर मामलों में उचित कार्रवाई होती है। पुलिस हर किसी की सुरक्षा व रक्षा के लिए है किसी को न तो प्रताड़ित किया जाता है और न ही परेशान। माती पुलिस चौकी में हुई आगजनी मामले में जो दोषी है पुलिस उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई करेगी अन्य किसी ग्रामीण से पुलिस को कोई मतलब नहीं है।
- कुंवर ज्ञानंजय सिंह, एएसपी
जिले की कानून व्यवस्था चौकस रखने के लिए पुलिस को सख्त निर्देष हैं। किसी भी घटना में पुलिस वाले की लापरवाही मिलती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- योगेश्वर राम मिश्रा, डीएम