एक ही परिवार के सदस्यों के नाम समूह बनाकर फार्म मशीनरी बैंक योजना में जमकर लूटपाट की गई। मानकों को दरकिनार रखकर हुए इस खेल के चलते आम किसान सरकारी योजना का लाभ पाने से कोसों दूर रह गए। भ्रष्टाचार के गठजोड़ में हुए घोटाले की हकीकत अमर उजाला ने बारीकी से देखी। पता लगा कि जिन समूहों को इसका लाभ मिला है उनमें स्वयं अध्यक्ष, पत्नी कोषाध्यक्ष व भाभी को सचिव व अन्य परिवार के सदस्यों को सदस्य बनाकर लाखों का अनुदान हडप लिया गया है। कृषि विभाग में 1.92 करोड़ रुपये की फार्म मशीनरी बैंक योजना में घोटाले की खबर प्रकाशित होने के बाद सोमवार को कार्यालय खुला तो इस योजना से जुड़े अभिलेख को दुरूस्त करने में पूरा दिन बीत गया।
बीटीएम को लाभ पहुंचाने में हुआ खेल
त्रिवेदीगंज ब्लॉक के हसनपुर निवासी दीपक कुमार कृषि विभाग में आत्मा योजना के तहत सूरतगंज ब्लॉक में बीटीएम के पद पर तैनात हैं। उसने अपने नाम से दीपक स्वयं सहायता के नाम का समूह बनाकर स्वयं अध्यक्ष बना व पत्नी सविता को कोषाध्यक्ष व भाभी प्रियंका का सचिव बनाकर परिवार के अन्य लोगों को सदस्य बना दिया। उसके बाद विभाग में जुगाड़ कर फार्म मशीनरी योजना का लाभ ले लिया। जबकि दीपक से पूर्व छह फार्म मशीनरी बैंक योजना में समूह के नाम रजिस्ट्रेशन कराने वाले 6 समूह किसान जो असली हकदार थे वह लाभ पाने से वंचित रह गए।
अध्यक्ष को नहीं पता योजना की हकीकत
सिरौलीगौसपुर में फार्म मशीनरी बैंक योजना का लाभ पहुंचाने के लिए एक रिटायर्ड लेखपाल के पुत्र ने पूर्व में रजिस्ट्रेशन कराने वाले गांव के सीधे-साधे किसान रंजीत को अध्यक्ष बनाकर एक समूह का गठन कर योजना का लाभ ले लिया। समूह में अपनी पत्नी अर्चना को कोषाध्यक्ष बना दिया। उसके बाद अनुदान की धनराशि से पूरे उपकरण न लेकर ट्रैक्टर व कल्टीवेटर खरीदकर अपने प्रयोग में ले रहा है। इस समूह में सदस्य बने रामनरेश, महेश, राजकुमार तक को नही पता की योजना का मूल मकसद क्या है। अध्यक्ष रंजीत बताते है कि एक दिन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली मिली थी। उन्होंने बताया कि समूह के सभी अभिलेख रिटायर्ड लेखपाल बननवारी के पास ही है।
स्वयं अध्यक्ष व बेटे को बना दिया समूह का कोषाध्यक्ष
मसौली ब्लॉक के देवकलियां गांव निवासी मंजू देवी ने जय जवान जय किसान के नाम से समूह बनाकर स्वयं अध्यक्ष व बेटे संजय को कोषाध्यक्ष व देवर भानुप्रताप को सचिव बनाकर योजना का लाभ ले लिया। जबकि उनका रजिस्ट्रेशन नाम से था। जिसके बाद इसी ब्लॉक में समूह के नाम से पूर्व में रजिस्ट्रेशन कराने वाले समूह लाभ से दूर रहे । मंजू देवी के समूह में शामिल अन्य सदस्य सोहनलाल व माधूरी भी मुहल्ले के ही। वर्ष 2017-18 में मिली अनुदान की मिली राशि से ट्रैक्टर, रोटोवेटर व इंजन खरीद कर अपने काम लिया जा रहा है। ग्रामीण सिर्फ इतना जानते है कि ट्रैक्टर कर्ज पर लिया था। समूह के नाम लेने की बात तक नहीं जानते।