बाराबंकी। जैदपुर थाने में वर्ष 2002 में दर्ज बिजली तार चोरी के मामले में अदालत ने अभियोजन की लचर पैरवी पर सवाल उठाते हुए अदालत ने दो आरोपियों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान करीब 20 साल तक अभियोजन पक्ष अदालत में एक भी गवाह पेश नहीं कर सका।
अभियोजन के अनुसार, रामसनेहीघाट में तैनात बिजली विभाग के जेई एके तिवारी ने तीन गांवों में बिजली के तार चोरी से काटने का मामला दर्ज कराया था। तब के समय 2.27 लाख रुपये का नुकसान बताया गया था। पुलिस ने विवचेना के दौरान बहराइच जिले के जरवल रोड थाना क्षेत्र के भवानीपुर गांव निवासी सब्बीर, सिराज व नबीगंज गांव निवासी नसीर के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया।
मुकदमा दर्ज होने के चार साल बाद सुनवाई शुरू हुई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान फर्द साक्षी मौजीलाल ने भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया। अभियोजन पक्ष लंबे समय तक कोई गवाह पेश नहीं कर सका। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्यम द्विवेदी ने अपने आदेश में कहा कि 20 साल से मुकदमा लंबित है।
साक्ष्य प्रस्तुत न किया जाना अभियोजन की लचर कार्यप्रणाली का द्योतक है। अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को साबित करने में सफल नहीं रहा। ऐसे में नसीर और सिराज को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। अदालत ने दोनों आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया। वहीं, तीसरे आरोपी सब्बीर की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी थी।