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Barabanki News: लाखों के नुकसान पर मुआवजा दो-तीन हजार

Tue, 28 Mar 2023 01:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। बीमा हो या अन्य सरकारी घोषणाएं, किसानों को दैवीय आपदाओं से होने वाली क्षतिपूर्ति मिलना आसान नहीं है। मिल भी जाए तो हालात यह हैं कि लाखों लागत के बाद भी सिर्फ दो-तीन हजार ही मिलते हैं। इससे सिंचाई, खाद, पानी व जुताई में से किसी एक का भी पैसा निकल पाना मुश्किल है। खरीफ की फसल को हुए नुकसान की भरपाई अब भेजी जा रही है, जब रबी की फसल दैवीय आपदा में बर्बाद हो चुुुकी है, ऐसे में किसान अपना दर्द कहे तो किससे। किसानों से बातचीत पर आधारित एक रिपोर्ट-
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लागत की भी भरपाई नहीं
सिरौलीगौसपुर के श्याम नगर के रहने वाले किसान बालचंद ने बताया कि 10 बीघा धान के खेतों में पानी भर जाने से फसल सड़ गई थी, जिसका मुआवजा तीन हजार रुपये मिला है। मुनाफा तो दूर भरपाई भी नहीं हुई।



आधा-अधूरा मुआवजा
सरयू नदी की तलहटी में स्थित कोठीडीहा गांव के रसंत प्रसाद सिंह ने बताया कि खरीफ की फसल के समय बाढ़ का सर्वे पूरा न होने के चलते आधा अधूरा ही मुआवजा मिला है, जिसमें लागत मूल्य निकलना भी मुश्किल है।
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ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई मदद
सूरतगंज क्षेत्र के तेलवाय निवासी हरिनाम ने बताया कि पिछले साल धान की 10 बीघे फसल नष्ट हो गई थी। मात्र दो हजार रुपये मुआवजा मिला है, जबकि नुकसान एक लाख का हुआ है। ये मदद तो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई।



बारिश से फसल चौपट
सूरतगंज क्षेत्र के महमूदपुर गांव निवासी किसान सुरेश चन्द्र बताते हैं कि खरीफ में पांच बीघा धान की बारिश में पूरी तरह से चौपट हो गई थी। नुकसान के एवज में सिर्फ दो हजार रुपये मुआवजा मिला है।




केवल तीन हजार मुआवजा

रामनगर तहसील क्षेत्र मधवाजलालपुर गांव निवासी किसान कृष्ण मुरारी बताते हैं कि पिछले साल 6 बीघा धान की फसल लगाई थी, लेकिन क्या पता था बेमौसम बारिश पूरी फसल चौपट कर देगी। सिर्फ तीन हजार मुआवजा मिला है। -



11 साल बाद भी नहीं मिल सका मुआवजा
देवां क्षेत्र के देवकलिया निवासी शिवनरायण ने वर्ष 2011-12 में सरकारी बैंक से केसीसी पर 1.35 लाख का कर्ज लिया था। साथ ही बीमा कंपनी से फसल का बीमा कराया था। इसी बीच हुई भारी बारिश व ओलावृष्टि में उसकी 35 बीघा आलू व मेंथा की फसल बर्बाद हो गई थी। राजस्व टीम के सर्वे के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर किसान ने सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद समिति ने जांच में मामला सही पाते हुए रिपोर्ट लगा दी थी, लेकिन फिर भी मुआवजे की फाइल अधर में लटक गई। 11 वर्ष बाद भी किसान मुआवजा पाने के लिए दर-दर भटक रहा है। कहीं सुनवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली है।



औद्यानिक फसलों पर मुआवजा नहीं
जिले में औद्यानिक फसलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। बावजूद इसके प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ में केला, मिर्च और पान की फसलों का ही बीमा कराया जा सकता है, जबकि रबी में टमाटर, मटर के साथ आम की फसलों के लिए यह व्यवस्था लागू है। हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से बड़े पैमाने पर शिमला मिर्च, खीरा, तरबूज, गोभी समेत अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा है, जिन्हें किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिलेगा।
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