बाराबंकी। गर्मी और उमस के बीच जिले की बिजली व्यवस्था भी हांफने लगी है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रही है, लेकिन गांवों में तस्वीर इससे उलट है। कहीं रोस्टिंग के नाम पर घंटों बिजली काटी जा रही है तो कहीं ओवरलोडिंग और फाल्ट के कारण रातभर आपूर्ति ठप रह रही है। रविवार रात अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली संकट के कारण लोग उमस में रात काटने को मजबूर रहे।
हैदरगढ़ क्षेत्र के 250 से अधिक गांवों में पूरी रात महज एक घंटे बिजली मिली। बाबागंज में निर्धारित आपूर्ति के बीच करीब 11 घंटे कटौती हुई। मसौली में 33 हजार केवी लाइन का जंफर कटने से करीब छह घंटे और त्रिलोकपुर में ओवरलोडिंग के कारण पांच घंटे बिजली गुल रही। विभाग से ग्रामीणों का सवाल है कि बिजली की मांग और लोड बढ़ने के बावजूद ट्रांसफार्मर व लाइनों की क्षमता उसी अनुपात में क्यों नहीं बढ़ाई गई।
270 गांवों में 11 घंटे कटौती
घुंघटेर। बाबागंज विद्युत उपकेंद्र से जुड़े करीब 270 गांवों की ढाई लाख आबादी अघोषित कटौती से परेशान रही। ग्रामीणों के अनुसार निर्धारित 18 घंटे की आपूर्ति में करीब 11 घंटे बिजली नहीं मिली। रात में बिजली गुल होने पर लोगों को मोमबत्ती और मिट्टी के तेल के दीये के सहारे काम करना पड़ा। जेई विवेक मिश्रा ने बताया कि निंदूरा पावर स्टेशन से जितनी बिजली मिल रही है, उसी के अनुसार आगे आपूर्ति की जा रही है।
हैदरगढ़ में पूरी रात बिजली का इंतजार
हैदरगढ़। मंझार, बहुता, त्रिवेदीगंज समेत 250 से अधिक गांवों में रविवार शाम छह बजे से सोमवार सुबह 11 बजे के बीच रातभर में करीब एक घंटे ही बिजली मिली। उमस से परेशान लोग घरों के बाहर और छतों पर बैठे रहे। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। अधिशासी अभियंता रमेश कुमार ने बताया कि आपूर्ति प्रभावित होने का कारण आकस्मिक रोस्टिंग रहा।
मसौली में छह घंटे ठप रही 33 हजार केवी लाइन
मसौली। चंदोली उपखंड से आई 33 हजार केवी लाइन में दहेजिया के पास जंफर कट गया। रविवार देर रात से सोमवार सुबह 7:30 बजे तक करीब छह घंटे आपूर्ति बाधित रही। इससे करीब 250 गांवों की ढाई लाख आबादी प्रभावित हुई। जेई मनीष कुमार यादव ने बताया कि फाल्ट दुरुस्त कर आपूर्ति बहाल कर दी गई।
त्रिलोकपुर में ओवरलोडिंग बनी वजह
त्रिलोकपुर। उपकेंद्र से जुड़े 96 गांवों की करीब 90 हजार आबादी रविवार रात पांच घंटे तक अंधेरे में रही। जेई अजीत यादव के अनुसार कम क्षमता के ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड होने से समस्या आ रही है। इसके समाधान के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।