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दावा हवा-हवाई, नहीं चला कूड़ा निस्तारण प्लांट, शहर में गंदगी की भरमार

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बाराबंकी। अप्रैल में आग लगने से जलीं कूड़ा निस्तारण प्लांट की मशीनों को अब तक सही नहीं कराया जा सका है। पिछले आठ माह से प्लांट ठप है।
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जबकि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) ने 10 दिनों में प्लांट को शुरू कराने का दावा किया था। निस्तारण प्लांट के आसपास कूड़ा लगातार डंप किया जा रहा है।
निस्तारण न होने से कचरे के सड़ने के कारण फैल रही बदबू से लोग परेशान हैं। लेकिन अधिकारियों को इससे कोई सरोकार नहीं।
नगर पालिका परिषद के दायरे में शहर के 29 वार्डों में करीब तीन लाख आबादी है। शहर के मोहल्लों में साफ-सफाई के लिए करीब सवा चार सौ सफाई कर्मी तैनात हैं जो सुबह व शाम की शिफ्ट में करते हैं।
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लेकिन कूड़ा निस्तारण प्लांट खराब होने से कूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। नतीजतन प्लांट के आसपास कूड़ा डंप हो रहा है। इस समय करीब 12 हजार टन कूड़ा प्लांट के आसपास डंप है।
इसके चलते लखपेड़ाबाग, आजाद नगर, लक्ष्मणपुरी कॉलोनी, सरावगी, कानून गोयान, घंटाघर, लाजपतनगर, पीरबटावन, घोसियाना, देवा मार्ग, शुक्ला कॉलोनी, मकदूमपुर, पैसार, दीनदयालनगर, दयानंदनगर ,सिविल लाइन, तहसील कॉलोनी, आवास विकास कॉलोनी आदि मोहल्लों में गंदगी की भरमार है। निस्तारण प्लांट पर लगा कूड़ा सड़ रहा है। इससे बदबू फैलने से लोगों का निकलना दूभर है।
2013 में शहर में करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाया गया था। प्लांट में प्रतिदिन करीब 200 टन कूड़ा निस्तारित करने की क्षमता है। कूड़े को निस्तारित कर ढाई मेगावाट बिजली भी बनाई जाती थी।
कुछ दिन प्लांट चला। आबादी के बीच होने के चलते इसका विरोध भी खूब हुआ। लेकिन इसी साल अप्रैल में आग लगने से मशीनेें जल गईं थीं और प्लांट बंद हो गया था।
‘अमर उजाला’ ने मामले को उजागर किया। इसी माह ईओ पवन कुमार ने 10 दिनों में कूड़ा निस्तारण प्लांट शुरू कराने का दावा किया था। लेकिन उनका दावा भी हवा-हवाई साबित हुआ। शासन ने भी इसको लेकर नगर पालिका के अफसरों से जवाब मांगा था।
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शहर में लगे कूड़ा निस्तारण प्लांट को शुरू कराने के लिए प्रयास जारी है। जल्द ही प्लांट शुरू हो जाएगा। सभी मोहल्लों में बेहतर तरीके से साफ-सफाई होती है। इसमें यदि लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई होगी।
पवन कुमार, ईओ
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