बाराबंकी। कड़कड़ाती ठंड और हिमपात से जान बचाने की खातिर सात समंदर पार से आए मेहमान परिंदों ने क्षेत्र की झीलों के किनारे आशियाना बनाना शुरू कर दिया है। झीलों के किनारे शांत वातावरण में घने पेड़ों पर डेरा जमाने वाले यह मनमोहक माइग्रेटी (प्रवासी) यहां प्रवास के दौरान प्रजनन भी करते हैं। यह पक्षी आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, साइबेरिया, रूस, जापान, तिब्बत आदि देशों से हजारों मील का सफर तय कर यहां आते हैं और गर्मियों के दस्तक देते ही अपने वतन लौट जाते हैं। जिले की प्रमुख झीलों में विदेशी परिंदों का आगमन लोगों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।
वन विभाग भी इन पक्षियों की देखरेख के साथ इनकी गणना में जुट गया है और इन्हें शिकारियों से बचाने के लिए कॉम्बिंग तेज कर दी है। यह पक्षी अपने अनुकूल जलवायु की ओर विचरण करते हुए यहां आते हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर के महीने से इन पक्षियों का यहां आना शुरू हो जाता है और फरवरी के महीने तक चलता है।
विगत वर्ष पर नजर डालें तो जिले की विभिन्न झीलों में करीब साढ़े तीन हजार विदेशी पक्षियों के पहुंचने की बात सामने आई थी। इस बार भी काफी संख्या में यह पक्षी यहां पहुंचने लगे हैं। विभाग द्वारा ऐसे पक्षियों के शिकार पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। वनरक्षकों ने झीलों के आसपास कॉम्बिंग भी तेज कर दी है और यदि कोई शिकार करते मिलता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाती है। (संवाद)
पक्षियों की पसंद जिले की प्रमुख झीलें
जिले में एक दर्जन से अधिक झीलें हैं। इनमें हरख की लंबौआ झील, हैदरगढ़ की नरदही झील, फतेहपुर की भगहर झील, सदर की कमरावां झील, देवा की सलारपुर झील, रामनगर की उदवतनगर झील, रामसनेहीघाट की सराय बरई झील, बेलहरा की किरकिच्ची आदि झीलें हैं जहां पर सर्दी के मौसम में विदेशी पक्षियों की आमद रहती है।
इन पक्षियों का रहता बसेरा
यहां की झीलों में जो बड़ी संख्या में मेहमान परिंदे पहुंच रहे हैं। उनमें ओपेन बिल्ड स्टार्क, ब्रहानी डक, डेवसिक, कारमेंट, समन तथा लंबी और पीली चोंच वाले पेटेंट स्टार्क, हेडेड गोज, ब्लू चील्ड बीटर, ब्लैक टर्न, कामन टील व कामन रेड आदि विदेशी पक्षी शामिल हैं। सैकड़ों बीघा में फैली झीलों में स्वछंद होकर अठखेलियां करते इन परिंदों का कलरव वातावरण में एक अजीब सी हलचल पैदा कर देता है।
सर्दी के मौसम में कई देशों के पक्षी जिले की झीलों में अपना बसेरा बनाते हैं। इनकी देखरेख के लिए विभाग की टीम लगाई गई है। प्रत्येक वर्ष दिसंबर से फरवरी के बीच इन पक्षियों की गणना कराई जाती है। इनको शिकारियों से भी बचाने के लिए उचित प्रबंध किए गए हैं। यदि कोई शिकार करता मिलता है तो उसके खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की जाती है।
-रुस्तम परवेज, डीएफओ