सैफ के पिता और चाचा घुंघटेर में बेकरी का कारोबार करते हैं। सैफ आलोक जायसवाल की दुकान पर माल देने जाता था। इसी दौरान उसने घर के रास्ते, कमरों की स्थिति, दिनचर्या की जानकारी जुटा ली थी। जेल में सैफ और इस्माइल की दोस्ती हुई थी। इस्माइल ने अपनी बेटी की शादी भी सैफ से तय कर दी। बाद में दोनों ने बुलंदशहर के अपराधी रोहित जाट से हाथ मिला लिया। रोहित ने नया गैंग का गठन हुआ और वारदात की पटकथा लिखी गई।
चार घर में घुसे, दो करते रहे निगरानी
घटना वाली रात सभी छह बदमाश एक जगह जुटे। बलवंत ने वारदात स्थल से करीब एक किमी पहले पेट्रोल पंप के पास कार रोक दी। बाकी बदमाश पैदल आगे बढ़े। उधर, अबरार ग्वारी चौराहे के पास देर रात तक पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखता रहा। जैसे ही रास्ता साफ मिला, सैफ, रोहित जाट, जसीम और इस्माइल घर में घुस गए और वारदात को अंजाम दे डाला।