बाराबंकी। लोधेश्वर महादेवा के दिव्य सानिध्य और महाभारत कालीन पारिजात अक्षयवट व कुंतेश्वर महादेव के आशीर्वाद की पावन धरा पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां की समृद्धशाली विरासत को कोटि-कोटि नमन किया। सरयू और आदिगंगा गोमती के पवित्र जल से आच्छादित इस भूमि को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि यह धरा केवल इतिहास नहीं, बल्कि अदम्य शौर्य, सनातन संस्कृति और अनगिनत प्रभावशाली विभूतियों का सजीव प्रतीक है। देश और धर्म के लिए सर्वस्व अर्पण करने वाली इन महान आत्माओं के गौरव से वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराना ही सरकार का मुख्य ध्येय है।
स्वतंत्रता संग्राम में अलख जगाने वाले मात्र 18 वर्ष के युवा राजा बलभद्र सिंह चहलारी का स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने रणबांकुरों के साथ मिलकर अंग्रेजों को लोहे के चने चबवा दिए थे और उनकी नींव हिला दी थी। इसके साथ ही उन्होंने हाॅकी के जादूगर केडी सिंह की हवेली को म्यूजियम बनाने के साथ वीरों के बलिदान और सनातन के प्रति समर्पण को श्रद्धापूर्वक याद किया।
साहित्य, साधना और संस्कृति के क्षेत्र में इस माटी के अमूल्य योगदान को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने ओजस्वी साहित्यकार गुरु प्रसाद मृगेश, संत कवि बाबा बैजनाथ, चतुर्भुज दास, जगजीवन दास, रविदत्त मिश्र, महेश दत्त शुक्ल और कैप्टन शंकर दयाल वाजपेयी जैसी महान विभूतियों का नमन किया।
उन्होंने कहा कि जहां एक ओर इन साधकों और साहित्यकारों ने आध्यात्मिक व बौद्धिक चेतना जगाई, वहीं दूसरी ओर पद्मश्री राम शरण वर्मा जैसे प्रगतिशील किसानों ने अपनी निष्ठा और मेहनत से कृषि क्षेत्र में नव-उत्कर्ष की नई गाथा लिखी। देश और समाज के निर्माण में योगदान देने वाले इन सभी नायकों की विरासत को सहेजकर भावी पीढ़ी तक पहुंचाना ही इस पावन धरा का सच्चा सम्मान है।