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VIDEO : देखते ही देखते सरयू में समा गया मकान, आशियाना उजड़ने से रो पड़े ग्रामीण, 380 बीघा जमीन लील गई नदी

Wed, 09 Sep 2026 06:01 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, सूरतगंज (बाराबंकी)

सार

नदी का कटान बढ़ने से ग्रामीण दहशत में हैं और बरसों से बनाई गई गृहस्थी के बह जाने पर रो रहे हैं। अभी तक 380 बीघा जमीन सरयू में समा चुकी है।
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बाराबंकी में बढ़ता जा रहा नदी का कटान। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सूरतगंज के तमापुर गांव में सरयू नदी की कटान लगातार तेज होती जा रही है। बाबा नारायण दास समाधि स्थल सरयू से महज 25 मीटर की दूरी पर नदी की धारा अब खेतों के साथ ग्रामीणों के आशियानों को भी अपने आगोश में ले रही है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक करीब 380 बीघा जमीन और उसमें खड़ी धान की फसल नदी में समा चुकी है। कटान की चपेट में आने से पालटू, राजू, रामलोटन, पम्मू और कल्लू के मकान भी नदी में समा चुके हैं। सभी परिवार अपना सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं।

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कटान बढ़ने से गांव में दहशत का माहौल है। रामू, श्यामू, रामराज समेत कई ग्रामीण अपने मकान खाली कर जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के बाद अब टूटे मकानों की ईंटें बटोरने में जुटे हैं, ताकि किसी तरह इन्हीं ईंटों से दोबारा आशियाना बनाया जा सके।

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कटान के बीच ग्रामीण परिवारों की बेबसी भी सामने आ रही है। मकान टूटते देख महिलाएं रो-रोकर अपना दर्द बयां कर रही हैं। एक महिला ने भावुक होकर कहा कि "मेरा घर टूट रहा है, मेरा वतन जा रहा है, हमें भी नदी में जाने दो।" महिलाओं को परिजन समझाते हुए उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं कि हालात सामान्य होने पर दोबारा मकान बना लिया जाएगा लेकिन घर और वर्षों की गृहस्थी को आंखों के सामने उजड़ता देख महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरयू नदी लगातार तेजी से कटान कर रही है लेकिन बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों की ओर से समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान रोकने के लिए ठोस इंतजाम पहले किए गए होते तो खेतों और मकानों को बचाया जा सकता था। अब नदी की धारा आबादी की ओर बढ़ती जा रही है, जिससे बचे हुए मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।

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