बाराबंकी। कहने को तो जिले में 22 सरकारी अस्पताल हैं और सभी आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध हैं परंतु हकीकत में यहां इलाज के नाम पर महज खानापूरी की जा रही है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो 15 अस्पताल ऐसे हैं जहां योजना के तहत एक भी लाभार्थी को उपचार की सुुविधा नहीं दी गई।
ये हालात तब हैं जब डिप्टी सीएम लगातार अस्पतालों का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं केे बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मगर अस्पतालों में तैनात चिकित्सक उनकी मंशा पर पूरी तरह से पानी फेरने में लगे हुए हैं और सरकार की ही योजनाओं का लाभ पात्रों को देने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
जिले में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की संख्या 17 लाख 19 हजार के आसपास है परंतु इनमें से अभी तक 3 लाख 95 हजार लोगों के ही आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। योजना से जुड़े लाभार्थियों को बेहतर उपचार की सुविधा दिए जाने के लिए 33 अस्पताल संबद्ध किए गए हैं।
इनमें 22 सरकारी और 11 निजी अस्पताल हैं। इनके जरिये अभी तक महज 17 हजार 953 लाभार्थियों को उपचार की सुविधा दी गई। लेकिन इनमें से सीएचसी रामसनेहीघाट, देवा, दरियाबाद, सिद्धौर और जहांगीराबाद के अलावा जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो 15 सीएचसी ऐसी हैं जहां पर अभी तक एक भी आयुष्मान योजना के लाभार्थी को उपचार की सुविधा नहीं दी गई।
हाल में हुई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जब इस बात की जानकारी जिलाधिकारी को हुई तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए सीएमओ को व्यवस्था में सुधार के आदेश दिए थे। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर आयुष्मान के लाभार्थियों का उपचार की सुविधा मुहैया कराने में कोई रुचि नहीं दिख रहे हैं।
योजना से जुड़े हैं ये अस्पताल
जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर, सीएचसी जहांगीराबाद, जाटा बरौली, सतरिख, बड़ागांव, सिद्धौर, त्रिवेदीगंज, हैदरगढ़, रामसनेहीघाट, मथुरानगर, टिकैतनगर, सिरौलीगौसपुर, रामनगर, सआदतगंज, सूरतगंज, फतेहपुर, देवा, घुंघटेर समेत 22 सरकारी और सफेदाबाद स्थित हिंद अस्पताल, मेयो अस्पताल, शहर का आहूजा नर्सिंगहोम, जैन नर्सिंगहोम, सांई अस्पताल, सीएनएस अस्पताल सतरिख, शेरवुड अस्पताल गदिया, आकांक्षा अस्पताल रामसनेहीघाट समेत 11 निजी अस्पताल संबद्ध किए गए हैं।
463 शिकायतों का हुआ निस्तारण
जिला शिकायत अधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि आयुष्मान योजना से जुड़ी विभिन्न पटलों के माध्यम से अब तक 463 शिकायतें प्राप्त हुई। जिलाधिकारी के निर्देश और सीएमओ से मिले मार्गदर्शन के बाद सभी शिकायतों का निस्तारण करा दिया गया है। मौजूदा समय में योजना से जुड़ी एक भी शिकायत लंबित नहीं है।
दवाएं न डॉक्टर इसीलिए नहीं आते मरीज
सरकारी अस्पतालों का हाल बेहाल है। यहां पर न दवाएं हैं और नहीं डॉक्टर हैं। ऐसे में योजना के लाभार्थी भी सरकारी अस्पतालों में आना उचित नहीं समझते हैं। देखा जाए तो जिले की कई सीएचसी ऐसी हैं जहां पर न तो सर्जन चिकित्सकों की तैनाती है और न ही आर्थो के डॉक्टर तैनात हैं। यहीं कारण है कि उपचार के लिए आने वाले मरीज हिंद और मेयो अस्पतालों में जाना ज्यादा मुनासिब समझ रहे हैं।
जिले में आयुष्मान योजना से जुड़े जितने भी लाभार्थी हैं उन सभी को योजना का लाभ दिए जाने के आदेश सभी सीएचसी अधीक्षकों को दिए गए हैं। यदि कहीं से भी योजना का लाभ न दिए जाने की शिकायत लाभार्थी द्वारा की जाती है तो वहां के अधीक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ