बाराबंकी। जिले में फैले बुखार का प्रकोप अब जानलेवा होने लगा है। बुखार से पीड़ित चार वर्षीय उमेश की जिला अस्पताल लाते समय रास्ते में ही मौत हो गई। जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती दो बुखार पीड़ितों में डेंगू के लक्षण भी मिले हैं। बुधवार को ओपीडी में एक हजार से अधिक बुखार पीड़ित इलाज के लिए पहुंचे। इनमें मलेरिया, डायरिया से लेकर डेंगू के लक्षण वाले मरीज शामिल होने से परेशानी बढ़ने लगी है।
सूरतगंज क्षेत्र के लालपुर करौता गांव में लालता प्रसाद का चार वर्षीय बेटा उमेश मंगलवार शाम को तेज बुखार के बाद उल्टी आने लगी। परिजन बुधवार की सुबह एम्बुलेंस से उसे लेकर सीएचसी सूरतगंज पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
जिला अस्पताल में बुधवार को ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक मरीजों का तांता लगा रहा। 19 सौ मरीज ओपीडी में देखे गए। जिसमें एक हजार के करीब बुखार से पीडित थे। जांच में लक्षण मिलने मिलने पर त्रिलोकपुर की अंजली और बिलखिया की गौरी को डेंगू वार्ड में भर्ती किया किया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुशवाहा ने बताया कि मौसम में आए बदलाव के कारण मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दो मरीज डेंगू के लक्षण वाले भर्ती हैं। जिनकी एलाइजा जांच कराई जा रही है। वहीं, सीएचसी सआदतगंज की ओपीडी में भी बुधवार को दो सौ मरीज पहुंचे। इनमें से लगभग 50 मरीज सर्दी, जुकाम बुखार, टाइफाइड से पीड़ित मिले।
समय पर मिलती एंबुलेंस तो बच सकती थी जान
सूरतगंज। चार वर्षीय उमेश को तेज बुखार के बाद भर्ती कराने के लिए परिजनों ने 108 एंबुलेंस को बुलाया था। नर्सरी लालपुर करौता गांव निवासी लालता प्रसाद ने बताया कि एंबुलेंस कर्मी बच्चे को सीएचसी सूरतगंज पहुंचाकर बिना भर्ती कराएं छोड़कर चले गए।सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजर्षि त्रिपाठी ने हालत गंभीर देख बच्चे का प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
उन्होंने 108 एंबुलेंस को बुलाने के लिए फोन भी किया। लेकिन कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। करीब 45 मिनट बाद एक अन्य एंबुलेंस से दूसरे मरीज के साथ परिजन बच्चे को लेकर जिला अस्पताल के लिए रवाना हुए। रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। पिता लालता प्रसाद का कहना है कि अगर समय से बच्चे को इलाज मिल गया होता तो शायद बच्चे की जान बच जाती। सीएचसी अधीक्षक डाॅ. राजर्षि त्रिपाठी ने बताया कि एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही के संबंध में उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा। (संवाद)