बाराबंकी। पूर्व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड का मुख्य आरोपी व लूट, डकैती व हत्या समेत करीब दो दर्जन से अधिक मुकदमों का आरोपी शातिर अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा इन दिनों बाराबंकी जिला कारागार के अस्पताल में अपना ‘दरबार’ सजा रहा है। करीब एक वर्ष से जिला जेल में बंद जीवा बीते दस माह से जेल अस्पताल में ही बसेरा बनाए हुए है। जीवा को क्या बीमारी है इसके बारे में न तो जेल अस्पताल के डॉक्टर ही कुछ बताने को तैयार हैं और न ही वहां के अधिकारी। जीवा से जेल में मुलाकात करने का कोई मानक भी नहीं है। जब और जिस दिन चाहो उससे मुलाकात हो सकती है और मुलाकातियों की संख्या पर भी कोई पाबंदी नहीं है।
पूर्व भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आया शातिर शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा इन दिनाें बाराबंकी जेल में बंद है। करीब एक साल पहले यहां पर जीवा को लाया गया था। जेल आने के चंद दिनों बाद ही जीवा को कारागार के अस्पताल की खास बैरक में भर्ती करा दिया गया। इस बारे में जेल अधिकारियों का तर्क है कि जीवा को कोई बीमारी है जिसके चलते उसे जेल अस्पताल में रखा गया है। आलम यह है कि जेल अस्पताल में बैठकर जीवा अपने सारे ‘धंधे’ चला रहा है। आए दिन उससे मिलने के लिए जेल में दर्जनों लोगों की लाइन लगी रहती है। शातिर अपराधी के रसूख के आगे उसके करीबियों को जेल में उसे मिलने से रोकने की किसी अधिकारी की हिम्मत ही नहीं होती। जेल अधिकारियों का इस बारे में कहना है कि जीवा किसी बीमारी से ग्रसित है जिसके चलते उसे डॉक्टरों की सलाह पर जेल अस्पताल में रखा गया है लेकिन बीमारी का नाम किसी को पता नहीं।
बाक्स- जेल में मौजूद सुविधाएं, बेरोकटोक होती मुलाकात
जेल सूत्रों की माने तो जीवा से मिलने के लिए कारागार गेट पर सिर्फ इतना बताना पड़ता है कि जीवा से मिलना है उसके बाद उसे रोकने की कोई हिम्मत नहीं करता। हर रोज जीवा से जेल में मिलने के लिए 25 से 30 लोग तक आते हैं। यही नहीं अस्पताल के जिस वार्ड में जीवा रहता है वहां वीआईपी व्यवस्था की गई है। कलर टेलीवीजन, फ्रिज समेत अन्य सुख-सुविधाओं के साधन के साथ मोबाइल व लैपटाप का इस्तेमाल भी जीवा खुलेआम करता है। यह सब जानते हुए भी जेल अधिकारी अनजान बने हुए हैं। यही नहीं बाराबंकी जिले में भी शहरी क्षेत्र में कई लोगों से मिलकर जीवा को प्रापर्टी का काम करना भी लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय अधिकारियों की माने तो जेल में किसी भी बंदी या कैदी से मिलने के लिए सप्ताह में सिर्फ दो दिन का ही समय दिया जाता है। यही नहीं एक दिन में सिर्फ तीन लोग ही मुलाकात कर सकते है। पर जीवा से जेल में मिलने का कोई मानक है और न कोई समय, जब चाहो उससे मुलाकात हो सकती है। इस खेल में उसका साथ देने वाले जेल के कर्मचारियों को उनका मेहनताना भी दिया जाता है। यही नहीं जेल में बंद शातिर अपराधियों से महीने में सिर्फ एक बार ही मुलाकात होने का प्रावधान है पर बाराबंकी जेल में बंद शातिरों के आगे इन सभी मानकों का कोई मतलब नहीं।
बाक्स- कड़ी सुरक्षा में ले जाया जाता अदालत
शूटर जीवा के ऊपर करीब 25 से अधिक अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आठ मुकदमे हत्या, लूट, डकैती, फिरौती, अपहरण आदि के हैं। जीवा को जब न्यायालय में पेशी पर ले जाया जाता है तो उसकी सुरक्षा के काफी सख्त बंदोबस्त भी किए जाते हैं।
वर्जन-
कारागार के अस्पताल में बंद संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा को क्या बीमारी है। इसके बारे में हम कुछ नहीं बता सकते हैं। उसे तकलीफ है इसीलिए जेल अस्पताल में भर्ती है।
डॉ. राघवेंद्र, जेल अस्पताल के चिकित्सक
वर्जन-
शातिर अपराधी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा को डॉक्टरों की सलाह पर जेल अस्पताल में रखा गया है। वह पिछले दस माह से अस्पताल में ही रह रहा है। जीवा से मुलाकात व अन्य मामलों में सामान्य कैदियों जैसी सुविधाएं ही दी जाती हैं।
अशोक सागर, जेल अधीक्षक