सिरौलीगौसपुर। अस्पताल में महिला डॉक्टर की तैनाती न होने के कारण यहां एएनएम प्रसव कराती है। सीएचसी पर लगा जनरेटर सिर्फ कागजों पर ही चलता है जिससे रात में आने वाली प्रसूताओं को परेशानी से गुजरना पड़ता है। डॉक्टरों के लिए बने आवास शोपीस हैं क्योंकि वे यहां नहीं रुकते हैं। खासकर रात में यहां मरीज को लाना किसी जोखिम से कम नहीं है।
सीएचसी सिरौलीगौसपुर पर रविवार को 0.15 बजे अमर उजाला की टीम पहुंची तो यहां पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था जबकि अस्पताल में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वीरेन्द्र मौर्या समेत सात डॉक्टरों की तैनाती है। इसके बावजूद सीएचसी का संचालन पीएचसी महमूदाबाद में तैनात डॉ. पीएन शुक्ला द्वारा किया जा रहा था। फार्मासिस्ट, एएनएम, वार्ड ब्वॉय और स्वीपर मौजूद थे। सीएचसी पर महिला डॉक्टर की तैनाती न होने के कारण एएनएम रमादेवी वॉर्ड ब्वॉय के सहयोग से प्रसव कराती हैं। प्रसव पीड़िताओं की सुविधा के लिए जनरेटर तो लगा है लेकिन यह सिर्फ कागजों पर ही चलता है जिससे रात में होने वाले प्रसव मोमबत्ती के उजाले में कराए जा रहे हैं। स्वीपर की तैनाती है इसके बावजूद अस्पताल में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। अस्पताल में कूडाघर तो बना है लेकिन उसमें ताला लटकता रहता है। डॉक्टरों और स्टाफ के रहने के लिए करीब 24 आवास बने हैं लेकिन इनमें कोई रुकता नहीं है। आवास मरम्मत के योग्य हैं और पीने के पानी की सुविधा नहीं है, प्रसाधन जाम पडे़ हैं। सीएचसी पर भर्ती प्रसव पीड़िता पूनम यादव ने बताया कि खाना नहीं मिला है। जानकारी पर बताया गया कि सीएचसी पर खाना बनाने की कोई सुविधा ही नहीं है। पहले ठेकेदार के माध्यम से बनवाया जाता था अब वह भी बंद हो गया है। अप्रैल से अब तक 14,808 मरीज देखे गए और करीब चार सौ प्रसव कराए गए। सीएचसी पर तैनात डॉक्टर मरीजों को बाहर से दवाएं लिखने से बाज नहीं आ रहे हैं। दुर्घटना में घायलों को लगाने के लिए टीटी का इंजेक्शन तक नहीं है। अस्पताल में डॉक्टरों के न रुकने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी डर से लोग यहां रात में मरीजों को लाने का जोखिम उठाने से बचते हैं।