हैदरगढ़ (बाराबंकी)। पंद्रह दिन पूर्व लापता एक किशोर की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत के बाद परिवारीजनों व कस्बावासियों ने जमकर हंगामा किया। पुलिस पर सूचना के बावजूद गुमशुदगी दर्ज न करने का आरोप लगाते हुए लोगों ने राजमार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया। मृतक की मां की शिकायत पर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आश्वासन पर शव उठाकर जाम हटाया गया।
कस्बे के कांशीराम कालोनी की रिजवाना बेगम पत्नी कमाल अहमद का 14 वर्षीय पुत्र छोटू बीते तीन अप्रैल को शीतला मंदिर पर लगे मेले में गया था। वापस नहीं लौटने पर रिजवान ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी लेकिन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। इसी दौरान आठ अप्रैल को लखनऊ-सुल्तानपुर रोड पर एक घायल किशोर बेहोशी की हालत में पाया गया था। राहगीरों के सीएचसी पर भर्ती कराने के बाद कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई थी। शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ने गंभीर अवस्था में उसे ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में भर्ती कराया था लेकिन किशोर के परिजनों को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। मंगलवार को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर से उसकी मौत की सूचना पर लापता पुत्र को तलाश रही रिजवाना बेगम को पुलिस ने लखनऊ जाकर शव देखने को कहा। शिनाख्त होने पर बुधवार को मां अपने पुत्र का शव लेकर कालोनी पहुंची तो कस्बावासियों का आक्रोश भड़क गया। लोग लापरवाही का आरोप लगाते हुए शव लेेकर सीओ आवास पहुंच गए। सीओ बीवी राय व कोतवाली प्रभारी आरडी यादव के समझाने पर लोग शांत होकर शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे। लेकिन अचानक फिर से शव को मुख्य चौराहे पर रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया जिससे लखनऊ-सुल्तानपुर राजमार्ग जाम हो गया।सीओ व कोतवाली प्रभारी ने मौके पर पहुंच कर लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
इस दौरान करीब आधा घंटा राजमार्ग अवरुद्ध रहा। सीओ बीवी राय ने कहा मृतक की मां रिजवाना बेगम ने गुमशुदगी दर्ज नहीं करने पर पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायत की है। जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।