बाराबंकी। जीजा के साथ मिलकर भाड़े के अपराधियों से प्रेमी की हत्या कराने के मामले में एडीजे अश्विनी कुमार ने जीजा-साली समेत पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 12 वर्ष पूर्व दिल्ली से अपहृत किए गए एक युवक की हत्या कर शव को सफदरगंज थाना क्षेत्र में फेंक दिया गया था। पुलिस ने ग्राम प्रधान की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट तो दर्ज की थी लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं कर सकी थी। उधर दिल्ली में दर्ज युवक के अपहरण की रिपोर्ट की तफ्तीश कर रही क्राइम ब्रांच ने बाराबंकी आकर मारे गए युवक की लाश की शिनाख्त कर वारदात का खुलासा किया था।
एडीजे अश्विनी कुमार ने मंगलवार को अपहरण और हत्या के 12 वर्ष पुराने इस मामले में आरोपी जीजा-साली समेत पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जिनमें हरियाणा के गुड़गांव कोतवाली अंतर्गत मकान नंबर 900/22 निवासी कमल किशोर और शक्ति पार्क निवासी उसकी साली विनी चुंग समेत लखनऊ के तीन भाडे़े के बदमाश शामिल हैं। बदमाशों में लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र निवासी शशीकांत, महानगर थाना अंतर्गत सचिवालय कॉलोनी निवासी आशीष चतुर्वेदी और इंदिरानगर निवासी विवेक मिश्रा को भी सजा सुनाई गई है। दरअसल गाजियाबाद ग्रेटर नोएडा निवासी शैलेंद्र सिंह अमेरिका एक्सप्रेस बैंक नई दिल्ली में काम करता था।
इससे पूर्व वह गुड़गंाव स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी करता था। जहां काम करने वाली विनी चुंग से उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था। यह बात उसके जीजा कमल किशोर को अच्छी नहीं लगती थी। कमल किशोर ने उसे डरा-धमकाकर शैलेंद्र सिंह के विरुद्ध कर दिया, यही नहीं जीजा ने साली के साथ मिलकर शैलेंद्र को ठिकाने लगाने की साजिश रच डाली। इस साजिश के तहत कमल किशोर ने लखनऊ निवासी उक्त तीनों बदमाशों से संपर्क किया। तय रणनीति के तहत 9 जनवरी 2002 को शैलेंद्र को कमल किशोर इंडियन एयर लाइंस की फ्लाइट से लखनऊ लेकर पहुंचा और एयरपोर्ट पर ही तीनों अपराधी उसके संपर्क में आ गए। इसके बाद चारों ने मिलकर शैलेंद्र को मौत के घाट उतार दिया और सफदरगंज थाना अंतर्गत ग्राम दादरा में फैजाबाद हाईवे किनारे उसका शव फेंक दिया। ग्राम प्रधान मुबीन अहमद की सूचना पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की और शव का पोस्टमार्टम कराया लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं करा सकी। उधर शैलेंद्र के पिता धीरेंद्र ने दिल्ली में डिफेंस कॉलोनी थाने में कमल किशोर के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करा दी। मामले की विवेचना कर रहे क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संजय सिंह कॉल डिटेल, एयर टिकट, डायरी, मोबाइल और बैंक स्टेटमेंट के आधार पर बाराबंकी पहुंचे और सफदरगंज पुलिस के पास मौजूद मृतक की तस्वीर व अन्य
वस्तुओं के माध्यम से मृतक की शिनाख्त कराई।
क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियोें को गिरफ्तार कर लिया था। इस प्रकरण में यहां चल रहे मुकदमे में मृतक के मां-बाप समेत तमाम लोगों के बयान दर्ज किए गए थे और आरोपियों की जमानत खारिज कर दी गई थी। इसी मामले में आखिरकार 12 वर्ष बाद पांचों आरोपियों को एडीजे अश्विनी कुमार ने उम्रकैद की सजा सुनाई।