बाराबंकी। बाराबंकी जिले का दशहरा अपने आप में मिसाल है। मान्यता है कि सतरिख स्थित गुरुकुल में भगवान श्रीराम ने अपने भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ शिक्षा प्राप्त की थी। यही कारण है कि यहां दशहरे का उत्सव धार्मिक आस्था और सामाजिक मेल-जोल का अद्भुत संगम पेश करता है।
बृहस्पतिवार को जिलेभर में करीब 88 स्थानों पर मेले का आयोजन होगा। इनमें से 64 स्थानों पर रावण के पुतले तैयार किए गए हैं। इस मौके पर कौमी एकता की झलक साफ नजर आती है। मेलों में सबसे अधिक कारोबार मुस्लिम समाज से जुड़े व्यापारी करते हैं।
जरौली के मो. बाला बताते हैं कि वे दशहरे में मिट्टी के खिलौने लेकर जाते हैं, जिनकी खूब बिक्री होती है। वहीं, जिले के कई गांवों में रावण और कुंभकरण के विशाल पुतले बनाने का जिम्मा मुस्लिम कारीगरों के हाथों में ही रहता है। एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि सभी आयोजनों पर सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।