घाघरा का जलस्तर स्थिर मगर बाढ़ का खतरा बरकरार
बाराबंकी। घाघरा नदी का पानी भले ही खतरे के निशान 20 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया हो लेकिन संकट अभी भी बरकरार है क्योंकि नदी का पानी किसी भी समय पलटी मार सकता है।
इससे बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं और बढ़ जाएंगी। वहीं, अपर जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करते हुए पीड़ितों में राहत सामग्री वितरण कराने का दावा किया है।
घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.276 पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। मगर बाढ़ प्रभावित इलाके में संकट अभी भी बरकरार है क्योंकि नदी का पानी कब बढ़ने लगे इसका कोई भरोसा नहीं है।
दरअसल एल्गिन चरसड़ी तटबंध कटने से जिले के छह गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और यहां के लोग घरों, मचानों और तटबंधों पर परिवारीजनों के साथ गुजर-बसर कर रहे हैं।
इनके सामने सबसे बड़ी समस्या मवेशियों के लिए चारा जुटाने की है। क्योंकि जिधर भी देखो पानी ही पानी नजर आ रहा है।
उधर, शनिवार को अपर जिलाधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने अन्य अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की।
एडीएम ने बताया कि, बाढ़ पीड़ितों में खाद्य सामग्री के पैकेट वितरण कराने के साथ ही अन्य सुुविधाएं भी मुहैया कराने के आदेश अधिकारियों को दिए गए हैं।
सिरौलीगौसपुर के ग्राम रायपुर व परसावल में बांध कटने के बाद हो रही तबाही से ग्रामीण भयभीत हैं। शनिवार को क्षेत्रीय विधायक सतीश शर्मा गांव का जायजा लेने पहुंचे तो ग्रामीण फफक पड़े।
इस पर विधायक ने एसडीएम को ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। तटबंध कटने की जानकारी मिलने के दूसरे दिन शनिवार को विधायक परसावल गांव पहुंचे।
ग्रामीणों ने आशंका जताई की अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो गांव के लोगों का सब कुछ तबाह हो जाएगा। जिस पर विधायक ने तत्काल सहायता उपलब्ध कराने एवं बाढ़ पीड़ितों की हर संभव मदद के आदेश दिए हैं।
मंडलायुक्त फैजाबाद मनोज मिश्र व आईजी ओंकार सिंह ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कोठरी गोरिया का निरीक्षण किया। घाघरा नदी की कटान से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों से बात की और उनकी समस्याएं पूछी।
मौके पर मौजूद तहसीलदार को बाढ़ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त नावें मुहैया कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि, बाढ़ प्रभावित परिवारों को राशन व मिट्टी का तेल मुहैया कराया जाए। पशुओं के चारे की व्यवस्था हो।
उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराएं। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
दो दिन के अंदर पशुओं के टीकाकरण के लिए गांवों में कैंप लगाएं जाएं। इससे पहले गांवों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें जिससे कोई भी पशु टीकाकरण से वंचित न रहने पाए। गांव को बचाने के लिए उन्होंने बाढ़ खंड अधिकारियों को तीन स्थानों पर कटर निर्माण के भी निर्देश दिए हैं।