जिले में 0 से लेकर 18 आयु वर्ग के चार लाख बच्चे ऐसे हैं जिनके अभी तक आधार कार्ड नहीं बन सके हैं। इससे उन्हें छात्रवृत्ति व अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। स्कूलों के शिक्षक इसके लिए इनके अभिभावकों को दोषी मान रहे हैं।
जिले में 18 वर्ष तक के आयु वर्ग के बच्चों की संख्या 7 लाख के आस-पास है। इनमें से 3 लाख बच्चे ऐसे हैं जिनके अभी तक आधार कार्ड बनाए जा सके हैं। वहीं जिला प्रशासन का दावा है कि बच्चों के आधार बनाए जाने के लिए समय-समय पर ब्लॉक और स्कूलों में आधार कैंप भी लगवाए जाते हैं।
जिले में 0 से 6 आयु वर्ग के बच्चों की संख्या 3 लाख 62 हजार 289 है। इनमें से अभी तक 1 लाख 53 हजार 830 बच्चों के ही आधार कार्ड बनाए जा सके हैं। वहीं परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 06 आयु वर्ग से लेकर 18 आयु वर्ग के बच्चों की संख्या करीब 3 लाख 65 हजार 4 सौ के आस-पास है।
इनमें से अभी तक 1 लाख 65 हजार 558 बच्चों के ही आधार कार्ड बनाए जा सके हैं। ई-डिस्ट्रिक मैनेजर की मानें तो यह आंकड़ा अभी तक ब्लॉकों और स्कूलों में लगाए जाने वाले कैंपों से मिल सका है।
अभी तकरीबन 4 लाख बच्चे ऐसे होेंगे जिनके आधार कार्ड नहीं बनाए जा सके हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इनके अभिभावक ही रुचि नहीं दिखाते हैं जिसकी वजह से इन बच्चों के अभी तक आधार कार्ड नहीं बनाए जा सके हैं।
छात्र बोले नहीं लगा कोई शिविर
रामसनेहीघाट क्षेत्र के बडेला नरायनपुर प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक में पढ़ने वाले छात्र हिमांशू का आधार कार्ड अभी तक नहीं बन सका है। इसी विद्यालय के छात्र अंकित का कहना है कि उसका भी अभी तक आधार कार्ड नहीं बनाया जा सका है।
इन छात्रों का कहना है कि आधार कार्ड बनाए जाने के लिए अभी तक विद्यालय में कोई शिविर ही नहीं लगाया गया है। काशीपुर निवासी छात्र शिवम का कहना है कि आधार कार्ड बनवाने के लिए ब्लॉक में लगाए जाने वाले शिविर पर गया था लेकिन अधिक भीड़ होने की वजह से वापस आना पड़ा। इसके बाद से अभी तक ब्लॉक पर शिविर नहीं लगा है।
अभिभावक बरतते लापरवाही
रामनगर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय गर्री में पढ़ाने वाले शिक्षक डॉ. आलोक शुक्ला का कहना है कि बच्चों को आधार बनाए जाने के लिए जब भी विद्यालय या फिर ब्लॉक पर शिविर लगाए जाते हैं तो अभिभावकों को इसकी जानकारी दे दी जाती है।
प्राथमिक विद्यालय शेखपुर अलीपुर के शिक्षक श्याम किशोर बाजपेयी कहते हैं कि विद्यालय में जब भी शिविर लगता है अभिभावकों के घर जाकर बच्चों का आधार कार्ड बनवाने के लिए बुलाया जाता है लेकिन अभिभावक हैं कि बच्चों को लेकर आते ही नहीं है।
प्राथमिक विद्यालय नींदनपुर की शिक्षिका ऋचा नाग का कहना है कि कई बार अभिभावकों से बच्चों का आधार कार्ड बनाए जाने के लिए कहा गया लेकिन अभिभावक कहते हैं आधार कार्ड बनने से कौन सा बच्चों को वजीफा मिलने लगेगा।
जिले में 0 आयु वर्ग से लेकर 18 की आयु वर्ग तक के बच्चों की संख्या करीब 7 लाख के आस-पास है। इनमें से 3 लाख से अधिक बच्चों के आधार कार्ड बना दिए गए हैं। जो बच्चे रह गए हैं उनके आधार कार्ड बनाए जाने का कार्य चल रहा है। इसके लिए एक समय सारिणी बनाई गई है उसी के अनुसार ब्लॉक और फिर विद्यालयों में कैंप लगाए जाते हैं। लेकिन अभिभावक हैं कि बच्चों का आधार कार्ड बनवाने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। -धर्मेन्द्र उपाध्याय, ई-डिस्ट्रिक मैनेजर