पावर कॉर्पोरेशन शुक्रवार से प्रदेश में बिजली बकाएदारों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने जा रहा है। विभाग की तैयारी है कि 10 हजार रुपये से ज्यादा के बकाएदारों की बिजली काट दी जाएगी। लेकिन ये अभियान भी पिछले अभियानों की तरह मात्र छोटे बकाएदारों तक सीमित रह जाएगा क्योंकि जिले में 15 बड़े बकाएदार सरकारी विभाग हैं, जिन पर लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये बकाया है। इन विभागों से वसूली करना पावर कॉर्पोरेशन के बस की बात नहीं है। बकाएदारों में डीएम, कप्तान और जिला जज भी शामिल हैं।
पॉवर कॉर्पोरेशन आम उपभोक्ताओं से पैसा वसूलने में आगे है। यहां तक कि 10 हजार से अधिक के बकाएदारों के केबल काटना, विद्युत कनेक्शन काट देना, आरसी जारी करना जैसी कार्रवाई पॉवर कार्पोरेशन के लिए आम बात है। लेकिन यहां भी जो अपने या पहुंच वाले होते हैं, उन कनेक्शनों की तरफ भूलकर भी पॉवर कार्पोरेशन रुख नहीं करता है।
पॉवर कॉर्पोरेशन के अधिकारी भी विद्युत चोरी की बात स्वीकार करते हैं और इसके लिए कई बार अभियान भी चलाए गए। इसके अलावा बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए ट्रांसफार्मर पर भी मीटर लगाए गए लेकिन नतीजा ढाक के वही तीन पात। पूर्व डीएम विकास गोठलवाल ने विभागों से विद्युत बिल जमा कराने में सख्ती बरती थी। जिस पर काफी हद तक सरकारी विभागों ने बिल जमा किया था। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद समस्या फिर ज्यों की त्यों हो गई।
पॉवर कॉर्पोरेशन के बड़े सरकारी बकाएदार
विभाग बकाया (रुपये में)
पुलिस विभाग 67 लाख
शिक्षा विभाग 59 लाख
स्थानीय निकाय 27 लाख
न्याय विभाग 11 लाख
प्रशासनिक विभाग 40 लाख
लोक निर्माण 17 लाख
कृषि विभाग 41 लाख
सिंचाई विभाग 21 लाख
कारागार 4 लाख
स्वास्थ्य विभाग 2 लाख
वन विभाग 2.5 लाख
सेल टैक्स 3 लाख
समाज कल्याण 2 लाख
गन्ना विभाग 2 लाख
खेल विभाग 4.75 लाख
विकास भवन 31 लाख