फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...श्रेणी ए के स्टेशन पर दूषित पानी पीने को मजबूर यात्री

विज्ञापन
विज्ञापन
...श्रेणी-‘ए’ स्टेशन पर दूषित पानी पीने को यात्री मजबूर
विज्ञापन

बाराबंकी। जिला मुख्यालय का रेलवे स्टेशन कहने को ‘ए’ श्रेणी का है लेकिन यहां स्थापित पानी टंकी की सफाई वर्षों से नहीं की गई। वहीं वाटर एटीएम भी शो-पीस बने हैं। ऐसे में रेल यात्री दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। चुनार की घटना के बाद भी जिम्मेदार लोगों का ध्यान इस ओर नहीं गया।

कहने को बाराबंकी रेलवे स्टेशन ‘ए’ श्रेणी का है लेकिन इस स्टेशन पर यात्रियों को ‘ए’ श्रेणी की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। स्टेशन पर स्थापित सवा दो लाख लीटर पानी की क्षमता वाली टंकी की वर्षों से सफाई नहीं हो सकी है। इस बात की चुगली टंकी तक पहुंचने वाली सीढ़ियों से पूर्व लगे गेट में बंद ताला कर रहा है।
विज्ञापन


वर्षों से ताला नहीं खुलने से उसमें पूरी तरह जंग लग गया है। वहीं प्लेटफार्म पर लगे नल के आसपास भी गंदगी की भरमार है। स्टेशन पर वाटर एटीएम भी लगाए गए थे। दो नंबर प्लेटफार्म पर लगा एटीएम महज शो-पीस बना है। ऐसे में रेल यात्री मजबूरन सप्लाई वाले दूषित पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं।

प्लेटफार्म नंबर दो पर ही लगे स्टाल पर खुले में रखे समोसे भी बेचे जाते हैं। इसकी जानकारी भी रेल प्रशासन को है लेकिन सालों से इन दुकानों की जांच तक नहीं हुई। पानी टंकी से कुछ दूरी पर ही पंप हाउस-1 है जिसे देखने से लगता है कि काफी समय से यह भी बंद पड़ा है। पंप हाउस के आसपास तमाम झाड़ियां उग आई हैं।

शहर के बस स्टेशन पर भी पानी की टंकी की सफाई करीब छह माह से नहीं की गई है। स्टेशन के फर्स्ट फ्लोर पर इन दिनो निर्माण कार्य चल रहा है। ऐसे में टंकी तक पहुंचने का रास्ता करीब एक सप्ताह से बंद है। स्टेशन पर वाटर एटीएम तो लगा ही नहीं है।

वाटर कूलर के पास काफी गंदगी फैली है। इस संबंध में एआरएम रोडवेज आरके वर्मा ने बताया कि इस समय निर्माण कार्य चलने के कारण रास्ता बंद है। टंकी की सफाई हर तीसरे व चौथे माह कराई जाती है।

रेल यात्री भगौती प्रसाद ने बताया कि स्टेशन पर लगा वाटर एटीएम दो रुपये का सिक्का भी हजम कर गया लेकिन पानी नहीं निकला। ऐसे में मजबूरी में सप्लाई का पानी पीना पड़ा। शमशाद आलम का कहना है कि स्टेशन पर सप्लाई का पानी दूषित होने के कारण प्लेटफार्म पर लगे स्टाल से महंगे दाम पर पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है।

इसकी शिकायत भी कई बार रेल अधिकारियों से की। फिर भी स्टालों से मनमाने दाम पर बेचे जा रहे पानी का रेट तय नहीं किया गया। रामसजीवन ने बताया कि स्टेशन पर दूषित पानी होने के कारण वह घर से बोतल में पानी लेकर आए हैं।

राकेश कुमार ने बताया कि वाटर एटीएम से काफी आराम था। दो रुपये में एक बोतल पानी मिल जाता था लेकिन अब स्टाल से एक बोतल पानी 25 रुपये में खरीदना पड़ रहा है।
विज्ञापन


आईओडब्लू रेलवे के कार्य निरीक्षक कुमार जयंत ने बताया कि पानी टंकी की सफाई रोटेशन के अनुसार 45 दिनों में कराई जाती है। सफाई कार्य के फोटोग्राफ रेलवे के उच्चाधिकारियों को भेजे जाते हैं। अभी हाल में ही टंकी की सफाई कराई गई है। इस समय बारिश में किसी भी ताले में दो दिनों में जंग लग जाता है। झाड़ियां भी उग आती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें