बाराबंकी। दुष्कर्म पीड़िताओं को सरकारी लाभ पाने के लिए विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। दुष्कर्म जैसी पीड़ा झेलने के बाद जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।इसके बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। एक साल में दुष्कर्म के 190 मामले सामने आए इनमें से सिर्फ 74 को ही योजना का लाभ मिल सका है 116 मामले जांच में अपात्र दिखाकर खारिज कर दिए गए।
सरकारी मदद न मिलने के कारण किसी को इलाज और देखभाल का खर्च उठाना पड़ रहा है तो किसी के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट बना हुआ है। इनकी मदद के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। देखा जाए तो एक साल में जिले में करीब दुष्कर्म 190 मामले सामने आए। इनमें से जांच के बाद 74 मामलों में पीड़िताओं को तीन से 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद के तौर पर सरकार की ओर से मुआवजा दिया गया। लेकिन 116 मामले जांच में अपात्र पाए गए हैं ऐसे में इन्हें मुआवजा नहीं मिल सका है जबकि यह मुआवजा पाने के लिए अधिकारियों से लेकर विभाग तक चक्कर काट रहीं है पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी सूरज सिंह ने बताया कि जिले में पिछले एक साल के अंदर दुष्कर्म के करीब 190 मामले दर्ज हुए हैं, इनमें से 74 मामलों में पीड़िताओं को योजना के तहत लाभ दे दिया गया है। जांच के दौरान 116 मामले अपात्र पाए गए हैं। मौजूदा समय में कोई भी मामला लंबित नहीं है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष योजना के तहत जघन्य हिंसा की शिकार महिलाओं और बालिकाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, छेड़खानी, एसिड अटैक और पॉक्सो एक्ट सहित नौ तरह के अपराध इसमें शामिल हैं। अपराध की अधिकारिक पुष्टि और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पीड़िताओं को तीन लाख से 10 लाख रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान है।
एक जगह से मिलेगा लाभ
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि एससी-एसटी के मामलों में सिर्फ एक जगह से ही लाभ मिल सकता है, चाहे वह जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां से हो या समाज कल्याण विभाग। वैसे ज्यादातर मामले जिला प्रोबेशन अधिकारी के यहां ही आते हैं। बताया कि एससी-एसटी वर्ग की दुष्कर्म पीड़िता को एक आरोपी होने पर पांच लाख और एक से अधिक आरोपी होने पर आठ लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।