एरिया मैनेजर के आश्वासन के बाद भी एफसीआई के मजदूरों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। शनिवार को भी सरकारी चावल की अनलोडिंग नहीं की जा सकी। आरोप है कि मिलर्स जब निजी मजदूर लेकर चावल की अनलोडिंग को पहुंचे तो एफसीआई के मजदूर मारपीट पर आमादा हो गए।
इससे मिलर्स में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और क्रय केंद्रों से धान की उठान भी लगभग ठप हो गई है। सरकारी चावल की अनलोडिंग को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एडीएम की फटकार और एरिया मैनेजर के आश्वासन के बाद भी एफसीआई के मजदूरों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है।
आरोप है कि पहले 13 सौ रुपये प्रति ट्रक की मांग की जा रही थी। अब यह 22 सौ रुपये प्रति ट्रक पहुंच गई है लेकिन मिलर्स किसी भी कीमत पर पैसा देने को तैयार नहीं हैं। शनिवार को जब वह निजी मजदूर लेकर एफसीआई गोदाम पर चावल की अनलोडिंग को पहुंचे तो यहां के मजदूर मारपीट पर आमादा हो गए।
इस वजह से चावल की अनलोडिंग नहीं हो सकी। मिल मालिकों का कहना है कि करीब 96 ट्रक अभी भी एफसीआई गोदाम के बाहर खड़े हुए हैं जिन्हें अनलोड नहीं किया जा रहा है।
जबकि एरिया मैनेजर ने शुक्रवार को वार्ता के दौरान आश्वासन दिया था कि यदि मजदूर चावल की अनलोडिंग नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मजदूर अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। इससे इसका असर क्रय केंद्रों पर लगे धान की उठान पर पड़ने लगा है।
एडीएम संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि एफसीआई के एरिया मैनेजर और मिलर्स के बीच शुक्रवार को वार्ता हुई थी। इसके बाद भी यदि मजदूर चावल की अनलोडिंग में आनाकानी कर रहे हैं तो पूरे प्रकरण से शासन को अवगत कराया जाएगा। शासन से मिले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एफसीआई के डिपो मैनेजर जीवन प्रकाश ने बताया कि एरिया मैनेजर से हुई वार्ता के बाद सरकारी चावल लेकर आने वाले ट्रकों को अनलोड कराया जा रहा है। जितने ट्रक चावल अब तक आया है वह अनलोड कराया जाएगा। मजदूरों पर पैसे की मांग का जो आरोप लगाया जा रहा है वह पूरी तरह से बेबुनियाद है।
राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमूल सिंह ने बताया कि एरिया मैनेजर के आश्वासन के बाद भी एफसीआई के मजदूर चावल की अनलोडिंग नहीं कर रहे हैं। निजी मजदूरों से ट्रकों की अनलोडिंग कराने पर वे मारपीट पर उतर आते हैं। इसलिए जब तक चावल की अनलोडिंग नहीं होगी, क्रय केंद्रों से धान की उठान नहीं की जाएगी।