बाराबंकी। जिले में अफीम की फसल की कटाई और संग्रहण का काम तेजी से चल रहा है। इस बार छह जिलों के करीब 263 किसानों से 16 क्विंटल अफीम विभाग ने जमा कराई है। ताजा माल गाजीपुर जिले की अफीम फैक्टरी भेजा जा चुका है।
हरख कस्बे को केंद्र बनाकर करीब 2000 किसानों से कड़ी सुरक्षा में डोडा जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जो चार मई तक चलेगी। जमा किया गया डोडा विशेषज्ञों की निगरानी में कंप्रेसर मशीन से बोरियों में पैक किया जा रहा है।
डोडा अफीम के पौधे का वह ऊपरी हिस्सा होता है जिसमें अफीम जमा होती है। इस साल केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और अफीम विभाग ने बाराबंकी, अयोध्या, लखनऊ, रायबरेली, मऊ और गाजीपुर जिलों के करीब 3000 से अधिक किसानों को अफीम की खेती के लिए 10-10 एरी क्षेत्रफल के लाइसेंस दिए थे।
इनमें से 639 किसानों को खुद अफीम निकालने (चीरा लगाने) की अनुमति दी गई थी जबकि बाकी किसानों को केवल डोडा जमा करने की अनुमति मिली थी। चूंकि प्रदेश में सबसे ज्यादा खेती बाराबंकी में होती है और लाइसेंस प्राप्त 80 प्रतिशत से ज्यादा किसान बाराबंकी से हैं, इसलिए बाराबंकी के कार्यालय से ही लाइसेंस देने के बाद अफीम और डोडा जमा करने का प्रमुख केंद्र बनाया गया है।
अब हरख कस्बे में बनाए गए पंडाल में डोडा जमा किया जा रहा है। 16 से 18 अप्रैल के बीच जिला अफीम कार्यालय में 263 किसानों से अफीम जमा कर ली गई है। अफीम विभाग के निरीक्षक मयंक गुप्ता ने बताया कि बृहस्पतिवार तक लगभग 615 किसानों से डोडा जमा कराया जा चुका है।
50 क्विंटल अफीम ले डूबा मौसम
फसल की बोआई नवंबर में हुई थी, फसल मार्च तक तैयार हो गई थी। करीब 800 किसानों ने मौसम अनुकूल न होने व अंतिम दिनों में बारिश होने से अफीम की पैदावार कम होने की आशंका जताई थी। इनके आवेदन पर विभाग की निगरानी में खेत से फसल नष्ट करवा दी गई थी। 10 ऐरी क्षेत्रफल में करीब छह किलो अफीम की पैदावार होती है। इस तरह 50 क्विंटल अफीम का झटका भी सरकार को झेलना पड़ा।