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बाढ को लेकर प्रशासन ने कसी कमर, सौंपी जिम्मेदारी

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बाराबंकी। घाघरा के भयावह तेवर को देख कर प्रशासन ने बाढ़ राहत के लिए कमर कस ली है। बाढ़ क्षेत्र के एसडीएम को अपने बाढ़ क्षेत्रों के गांवों व बंधों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए है। तहसील प्रशासन ने नाव-नाविक, गोताखोरों के साथ बाढ़ चौकी व बाढ़ राहत केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को तत्काल ड्यूटी स्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। रामनगर तहसील में 4 बाढ़ चौकी, 4 राहत केंद्र व 9 राहत शिविर बनाए गए हैं। वहीं तहसील प्रशासन ने 20 गोताखोर व 20 निजी नावों व एक 14 सीटर मोटर लांच का इंतजाम किया है। इसी प्रकार सिरौलीगौसपुर में 5 बाढ़ चौकी व 4 राहत केंद्र बनाए गए हैं। तहसील प्रशासन ने 29 गोताखोर व 32 नावों को अनुबंध कराया है। इसके अलावा 34 बाढ राहत शिविर भी बनाए गए है।
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रामसनेहीघाट तहसील में 7 बाढ़ चौकी व 77 राहत केंद्र तथा 15 राहत शिविर बनाए हैं। जिन पर ड्यूटी लगा दी गई है। 52 तैराकों के साथ 32 नावों का अनुबंध का कार्य पूरा कर लिया है। इसके अलावा 14 राहत शिविर भी बनाए गए है।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष में 12 प्रभारियों की तैनाती
कलेक्ट्रेट के बाढ़ नियंत्रण कक्ष में जिला स्तरीय 12 अधिकारियों को सप्ताहवार प्रभारी भी बनाया गया। जिसमें जिला कृषि अधिकारी, जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहायक सेवा योजन अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, भूमि संरक्षण अधिकारी कुर्सी, भूमि संरक्षण अधिकारी गोमती, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य, जिला प्रोबेशन अधिकारी, महा प्रबंधक दुग्धसंघ व जिला प्रबंधक पीसीएफ को नियंत्रण कक्ष का प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों की ड्यूटी 3 चरणों में लगाई गई है।
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