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Banda News: डेढ़ मीटर बढ़ी यमुना, चंद्रावल व केन के सभी रपटे डूबे

Sat, 05 Sep 2026 10:56 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो -14- गांव बदौसा में बारिश के पानी में डूबे घर निहारते परिजन। संवाद
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बांदा। लगातार बारिश से जिले में नदियों का जलस्तर बढ़ने और जलभराव से हालात बिगड़ गए हैं। यमुना का जलस्तर डेढ़ मीटर बढ़ गया है।
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नदियों के उफनाने से चंद्रावल व केन के सभी रपटे डूब चुके हैं। केन के जलस्तर में कमी और यमुना के बढ़ने की संभावना जताई गई है। फिलहाल लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।
शनिवार शाम केन नदी का जलस्तर 101.65 मीटर दर्ज किया गया। शुक्रवार रात यह 102 मीटर के पार था। दिन में जलस्तर कुछ कम होने से राहत मिली है। केन का चेतावनी बिंदु 103 और खतरे का निशान 104 मीटर है। वहीं यमुना का जलस्तर करीब डेढ़ मीटर बढ़कर 94.36 मीटर पहुंच गया है।
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देहात क्षेत्र में चंद्रावल और केन नदी के सभी रपटे पानी में डूब गए हैं। पैलानी तहसील में सिंधनकलां, तुर्री नाला, गौरी अमारा और नांदादेव-पड़ोहरा संपर्क मार्ग के रपटों पर पानी भर गया है। इन स्थानों पर लाइफ जैकेट के साथ नावों का संचालन कराया जा रहा है। प्रशासन ने रपटों पर पुलिस पिकेट लगाई है और ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील की है।
कमासिन क्षेत्र में बागेन नदी का जलस्तर बढ़ने से इटर्रा गांव का संपर्क मार्ग प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो नावें लगाई गई हैं। जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए दो बड़ी नावों की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए गए हैं। बागै नदी का पानी खेतों तक पहुंचने से फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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अधिकारियों ने लिया नदियों के जलस्तर का जायजा
डीएम अमित आसेरी और एसपी समेत अधिकारियों ने बागेन नदी पहुंचकर जलस्तर और बहाव की स्थिति देखी। ग्राम प्रधान गुढ़ाकलां संतोष निषाद से क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी ली। डीएम ने कहा कि तहसील प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। फिलहाल भयावह स्थिति नहीं है।
पैलानी एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने बताया कि केन का जलस्तर करीब एक मीटर घटा है। गगऊ बांध से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद केन का जलस्तर बढ़ा था। तहसीलदार महेंद्र कुमार गुप्त ने रपटों का निरीक्षण कर नाविकों को सीमित संख्या में लोगों को बैठाने और लाइफ जैकेट का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए।
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जलभराव से मकान, गृहस्थी और फसलें बर्बाद
बदौसा में अतिवृष्टि और रेलवे लाइन के किनारे जल निकासी मार्ग बंद होने से आबादी और खेतों में पानी भर गया। कई परिवारों के मकान, गृहस्थी का सामान और फसलें बर्बाद हो गईं। ग्रामीणों ने एसडीएम अतर्रा से स्थायी जल निकासी और मुआवजे की मांग की।
एसडीएम ने लेखपाल को मौके पर सर्वे कर नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। सैमरा गांव में भी जल निकासी नहीं होने से करीब 50 वर्ष पुराने कच्चे मकान ढह गए। कुछ परिवार मवेशियों के साथ गोशाला में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर दैवीय आपदा राहत कोष से मुआवजा और जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंची स्वास्थ्य टीम
जसपुरा क्षेत्र के बाढ़ और जलभराव प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक किया। गौरीकला, गडरिया, अमारा और सिंधनकलां में टीम ने 57 लोगों को दवाएं व स्वास्थ्य सामग्री वितरित की। जलभराव वाले स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर भी दिया गया। ग्रामीणों को दूषित पानी से बचने और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई।
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जसपुरा में एक दर्जन कच्चे मकान ढहे
बांदा। लगातार हो रही भारी बारिश से जसपुरा कस्बे में करीब 10 से 12 कच्चे मकान ढह गए। गनीमत रही कि अधिकांश परिवार समय रहते घरों से बाहर निकल गए। बारिश से राजकमल प्रजापति, नरेश, राजकिशोर वर्मा, मईयादीन प्रजापति, रामस्वरूप निषाद, रामराज कुशवाहा, गंगाचरण समेत कई लोगों के कच्चे मकान ध्वस्त हो गए।
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घर में रखा सामान मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गया। कई परिवार पड़ोसियों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से राजस्व टीम भेजकर नुकसान का सर्वे कराने और मुआवजा दिलाने की मांग की है। (संवाद)

फोटो -14- गांव बदौसा में बारिश के पानी में डूबे घर निहारते परिजन। संवाद

फोटो -14- गांव बदौसा में बारिश के पानी में डूबे घर निहारते परिजन। संवाद

फोटो -14- गांव बदौसा में बारिश के पानी में डूबे घर निहारते परिजन। संवाद

फोटो -14- गांव बदौसा में बारिश के पानी में डूबे घर निहारते परिजन। संवाद

फोटो -14- गांव बदौसा में बारिश के पानी में डूबे घर निहारते परिजन। संवाद

फोटो -14- गांव बदौसा में बारिश के पानी में डूबे घर निहारते परिजन। संवाद

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