बेंदा (बांदा)। नेशनल हाइवे पर यमुना नदी पर बना पुल
ओवरलोड वाहनों की धमाचौकड़ी से एक बार फिर क्षतिग्रस्त हो गया। बड़ा हादसा
टल गया।
पुलिस और पीब्ल्यूडी व सेतु निगम ने तत्काल प्रभाव से बड़े
और भारी वाहनों पर रोक लगा दी है। क्षतिग्रस्त स्थल पर बैरीकेडिंग लगा दी
गई है। वाहनों को चिल्ला रोड से भेजा जा रहा है। पुल का निरीक्षण करने
शुक्रवार को दिल्ली से टीम आ रही है।
बांदा-टांडा राष्ट्रीय
राजमार्ग पर बेंदा गांव के पास यमुना नदी में वर्ष 1980 में पुल बनाया गया
था। यह बांदा और फतेहपुर जनपद को जोड़ता है। चित्रकूटधाम मंडल का यह पहला
पुल था।
पिछले कुछ वर्षों से बालू और गिट्टी के ओवरलोड हैवी वाहन
इसी पुल से गुजर रहे हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा पुल की सड़क की मरम्मत न किए
जाने से इसमें जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं।
बृहस्पतिवार को सुबह बेंदा
से फतेहपुर चलने पर पुल की 13वें नंबर की कोठी क्षतिग्रस्त होकर धंस गई।
बड़ा वाहन निकलने से हादसे के हालात बन गए। तभी राहगीरों ने इसे देख लिया
और बेंदाघाट चौकी पुलिस को सूचना दी।
चौकी प्रभारी संतराम कुशवाहा
ने मुख्यालय में अफसरों को अवगत कराया। एसडीएम अनुज सिंह भी मौके पर
पहुंचे। नायब तहसीलदार जितेंद्र सिंह और लेखपाल उदयवीर सिंह भी उपस्थित थे।
तत्काल बड़े और ओवरलोड वाहनों का पुल से गुजरना रोक दिया गया।
बेरीकैडिंग लगाकर क्षतिग्रस्त क्षेत्र को चिह्नित किया गया है। सिर्फ छोटे
वाहन निकाले जा रहे हैं।
इस पुल से फतेहपुर, रायबरेली, सुल्तानपुर,
फैजाबाद और कानपुर और लखनऊ के लिए वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों को
पपरेंदा बाईपास होकर चिल्ला की तरफ से निकाला जा रहा है।
तिंदवारी
से चिल्ला की ओर जाने पर लगभग 30 किलोमीटर अतिरिक्त चक्कर पड़ेगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग अभियंताओं व सड़क निर्माण कंपनी के अधिकारियों ने पुल
का जायजा लिया।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को दिल्ली से टीम आकर पुल का निरीक्षण करेगी। इसकी मरम्मत और चालू होने में लगभग 15 दिन लग सकते हैं।
बेंदाघाट।
दो वर्ष पूर्व भी यह पुल क्षतिग्रस्त हो चुका था। इसकी तीन कोठियां
क्षतिग्रस्त होने से लगभग दो माह तक भारी वाहनों का आवागमन ठप रहा। वर्ष
2014 में फतेहपुर की ओर से पुल की 6, 7 व 8 नंबर कोठियां धंस गई थीं।
तीन
कोठियां क्षतिग्रस्त होने से पुल पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया
गया था। इसकी मरम्मत में लगभग दो माह लगे थे। इसके बाद वाहनों का आवागमन
बहाल हो सका था।