बांदा रेलवे स्टेशन में हमीरपुर सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल की निधि की लगाई गई पट्टिका।
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स्टेशन पर प्लेटफार्म व अन्य स्थानों पर मौजूद यात्रियों की बेंच तथा अन्य फर्नीचर पर रविवार को अचानक हमीरपुर के सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल के नाम की पट्टिका नजर आने से रेलवे स्टाफ सकते में आ गया। आनन-फानन रेलवे ने सांसद के नाम की पट्टिकाएं हटवाईं। साथ ही स्पष्ट किया कि इस फर्नीचर में सांसद निधि का कोई योगदान नहीं है।
रविवार को बिना किसी पूर्व सूचना के छह-सात लोग झांसी-इलाहाबाद पैसेंजर ट्रेन से रेलवे स्टेशन पर आए और रेलवे अधिकारियों से पूछे बिना प्लेटफार्म, वेटिंग रूम समेत स्टेशन अधीक्षक के चेंबर में रखी स्टील की कुर्सियों और बेंचों पर पट्टिकाएं लगा दीं। इन पट्टिकाओं पर ‘कुं. पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, सांसद (महोबा-हमीरपुर) द्वारा सांसद निधि से वित्त पोषित’ लिखा था। यह देख स्टेशन प्रबंधक और वाणिज्य निरीक्षक ने डीआरएम व मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (झांसी) को सूचना दी। अधिकारियों के निर्देश पर कुुछ ही देर बाद रेल अधिकारियों ने इन पट्टिकाओं को हटवा दिया।
स्टेशन प्रबंधक बीपी वर्मा ने बताया कि बिना किसी अनुमति के 22 पुरानी कुर्सियों और बेंचों पर पट्टिका लगाई गई थीं, जबकि ये रेलवे की संपत्ति हैं। सांसद निधि की नहीं। इन्हें वर्ष 2016 में स्टेशन पर हुए काम के दौरान लगाया गया था। वाणिज्य निरीक्षक संजय कुमार ने बताया कि पट्टिकाएं हटवा दी हैं। इस बारे में जानकारी करने पर सांसद चंदेल के प्रतिनिधि ने बताया कि रागौल और भरुआ स्टेशनों पर सांसद निधि से फर्नीचर दिया गया है। उन्हीं पर ये पट्टिकाएं लगानी थीं। ठेकेदार के स्टाफ ने भूल से बांदा स्टेशन पर लगा दिया।