बांदा। महिला किसानों को जैविक कृषि की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला रविवार को खत्म हो गया। आखिरी दिन महिला किसानों को तरल पदार्थ बनाने समेत की प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिए गए। बुंदेलखंड के विभिन्न जनपदों से आईं महिला किसानों ने इस प्रशिक्षण को अपने लिए बेहद लाभदायक बताया।
बड़ोखर खुर्द गांव में स्थित ह्यूमन एग्रेरियन सेंटर में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और आर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन आफ इंडिया के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में अंतिम दिन प्रशिक्षक शैलेंद्र सिंह बुंदेला ने महिला किसानों को बताया कि जैविक खाद खेती की उर्वरा शक्ति का मुख्य स्रोत है। यह खेती के लिए वरदान है। रासायनिक खाद खेती के विनाश का मुख्य कारक है।
ह्यूमन एग्रेरियन सेंटर संस्थापक और कार्यशाला के मेजबान प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह ने जैविक खाद, जीवामृत, अमृत पानी, गोमूत्र पानी, पंचगव्य, मटका खाद, तरल खाद कीटनाशी तैयार करने के तरीके और महत्व बताया। गुंजन मिश्रा ने महिला किसानों को एग्रेरियन सेंटर में जैविक खेती से हो रही खेती का अवलोकन कराया और तरल खाद बनाने के तरीके बताए। रवि प्रकाश शुक्ला ने प्रशिक्षिकों व किसान महिलाओं के प्रति आभार जताया।