चकबंदी में अंधेरगर्दी और अधिकारियों व कर्मियों की मनमानी से पूरे गांव में गांवदारी और मुकदमेंबाजी के हालात बन गए। कहीं सुनवाई न होने पर परेशान महिला और पुरुष किसान बुधवार को यहां कलक्ट्रेट में मिट्टी के तेल भरी बोतलें लेकर आ गए। आत्मदाह की चेतावनी दी। अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन सिटी मजिस्ट्रेट ने कक्ष से बाहर आकर उन्हें समझाया-बुझाया। उधर, चकबंदी विभाग के उप निदेशक ने क्षेत्रीय चकबंदी अधिकारी को जांच के आदेश दिए हैं।
सदर तहसील के सुरौली गांव में चकबंदी चल रही है। यहां के दर्जनों महिला-पुरुष किसान अपने हाथों में मिट्टी के तेल से भरी बोतलें लेकर कलक्ट्रेट पहुंच गए। उन्होंने बताया कि चकबंदी कर्मी एक चक को कई टुकड़ों में बांट रहे हैं। धार्मिक स्थलों को भी नहीं बख्श रहे। चकबंदी अधिकारियों व कर्मियों ने बांदा में बैठकर ही सर्वे कर दिया। मौके पर नहीं गए। किसी किसान को इसकी भनक नहीं लगी।
अब हालात यह हैं कि चकबंदी से पूरे गांव में झगड़े और विवाद हो रहे हैं। मुकदमेंबाजी शुरू हो गई है। किसानों में त्राहि-त्राहि है। महिलाओं ने कहा कि चकबंदी आयुक्त, डीएम, चकबंदी विभाग के डीडीसी, एसओसी, सीओ आदि सभी को शिकायत की गई, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन वह आत्मदाह के लिए मजबूर हुई हैं। पूरी चकबंदी की उच्च स्तरीय जांच की जाए और आपत्तियों का निस्तारण न होने तक प्रक्रिया रोकी जाए। वरना किसान आत्मदाह करेंगे।
सिटी मजिस्ट्रेट रमेशचंद्र तिवारी अपने कक्ष से बाहर आ गए और महिलाओं को समझा-बुझाकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। महिलाओं से उनका ज्ञापन लिया। उधर, चकबंदी विभाग के डीडीसी ने एसओसी को जांच करके कार्रवाई के निर्देश दिए। ज्ञापन देने वाले महिला-पुरुष किसानों में शीतला, पानकुमारी, राजकली, विनीता, माया, फूलकली, बद्री, राजू, रामदीन पाल, छेदीलाल, सियाराम पाल, रामऔतार, राममनोहर, चुनुबाद, राधेलाल, रज्जन आदि शामिल थे।