भूजल सप्ताह गोष्ठी में मंडलायुक्त शरद कुमार सिंह
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बुंदेलखंड में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। यहां के 47 विकास खंडों को राज्य भूजल संरक्षण मिशन में ले लिया गया है। किसानों से कहा गया है कि सिंचाई के लिए भूजल के बजाए बारिश का पानी रोककर उसे इस्तेमाल करें। बुंदेलखंड में 700 मिलीमीटर बारिश होती है। इसमें अगर 400 मिलीमीटर भी संरक्षित कर लिया गया तो पानी का संकट नहीं रहेगा।
यह बात बुधवार को यहां मयूर भवन सभागार में आयोजित भूजल सप्ताह के तहत आयोजित गोष्ठी में मंडलायुक्त शरद कुमार सिंह और भूजल विभाग के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार मिश्रा ने कही। मंडलायुक्त ने कहा कि पानी कुदरत का वो उपहार है जिसके बिना जीने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। बुंदेलखंड में पूर्वजों ने जल संरक्षण की बहुत अच्छी व्यवस्था कर रखी थी। आज फिर वही दोहराने की जरूरत है। गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में संरक्षित करना जरूरी है।
भूजल अधिशासी अभियंता ने कहा कि बुंदेलखंड में इतनी कम वर्षा नहीं होती कि सिंचाई न हो सके। बस जरूरत है तो बारिश के पानी को रोकने की। छोटे तालाब बनवाने और तालाबों के किनारे पेड़ लगाने से सतही जल संरक्षण होगा। खबरदार किया कि पानी का दुरुपयोग रोका नहीं तो 2030 तक जल संकट बेहद गहरा सकता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में यहां आई इसराइल की टीम ने भी यह सलाह दी थी कि भूजल को कृषि काम में प्रयोग न किया जाए। उन्होंने बताया कि 16 से 22 जुलाई तक भूजल सप्ताह मनाया जा रहा है।
भाजपा जिलाध्यक्ष लवलेश सिंह ने वाटर हार्वेस्टिंग तकनीक पर जोर दिया। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जगराम सिंह ने पानी का दुरुपयोग रोकने को कहा। गोष्ठी को भाजपा नेता प्रेमनारायण द्विवेदी, पूर्व प्रधानाचार्य बाबूलाल गुप्त, कवि चंद्रिका प्रसाद ललित व जवाहरलाल जलज, बाबूलाल शर्मा, सुधीर खरे कमल आदि ने भी संबोधित किया। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता नीरज कुमार भी उपस्थित रहे।