बांदा। बदलती जीवनशैली और बढ़ती जागरूकता के बीच अब महिलाएं भी फिटनेस को लेकर सजग होती जा रही हैं। पहले जहां जिम जाना पुरुषों तक ही सीमित था, वहीं अब महिलाएं भी अपनी सेहत को लेकर गंभीर हैं। खासतौर पर घरेलू महिलाएं, जो दिनभर घर और परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती हैं, अब अपने लिए समय निकालकर फिट रहने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
शहर के कई जिमों में अब महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशिक्षकों के अनुसार पहले जहां महिलाएं केवल वॉक या योगा तक सीमित रहती थीं, अब वे वेट ट्रेनिंग, कार्डियो और जुम्बा जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेने लगी हैं। हार्पर क्लब की नियो जिम फिटनेस ट्रेनर आशीष शुक्ला का कहना है कि महिलाएं अब स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं और यह समझ चुकी हैं कि फिट रहना सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक शांति के लिए भी जरूरी है।
यही नहीं स्कूली छात्राओं में भी फिटनेस का जुनून तेजी से पनप रहा है। सुबह-सुबह पार्कों और मैदानों में दौड़ लगाने, योग करने या एक्सरसाइज करते छात्राओं को देखकर यह स्पष्ट होता है कि नई पीढ़ी स्वास्थ्य के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक है। महिलाओं का कहना है कि नियमित योग और व्यायाम से न केवल शरीर फिट रहता है, बल्कि तनाव और थकान भी कम होती है। जिम जाने से दिनभर ऊर्जा बनी रहती है और आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होती है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. विनीत सचान बताते हैं कि फिटनेस की ओर यह रुझान महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच से महिलाएं न केवल स्वस्थ रह सकती हैं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।
प्रतिदिन करते हैं जिम, जीवन में देखने को मिला बदलाव
फोटो - 02 बबिता खत्री
मैं रोज सुबह जिम जाती हूं। पहले जल्दी थक जाती थी, अब शरीर में ऊर्जा महसूस होती है। जिम जाने से आत्मविश्वास बढ़ा है और शुगर जैसी बीमारी की दवाएं भी कम खानी पड़ती है।
- बबिता खत्री, गृहिणी
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फोटो - 03 ज्योति साहू
घर के कामों में व्यस्त रहने के बावजूद अब अपने लिए समय निकालती हूं। सुबह एक घंटा जिम जाती हूं। इससे न सिर्फ शरीर फिट रहता है, बल्कि मानसिक सुकून भी मिलता है।
- ज्योति साहू, गृहिणी
फोटो - 04 अंजली खत्री
घर में लंबे समय तक काम और तनाव भरे माहौल से राहत पाने के लिए मैंने जिम शुरू की। इससे नींद बेहतर हुई है और मूड भी अच्छा रहता है। फिटनेस से काम में फोकस और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।
अंजली खत्री, गृहिणी
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फोटो - 05 रागिनी
मैंने योग और जिम दोनों शुरू किए हैं। इससे मेरी सेहत में सुधार आया है। पहले कमर दर्द की समस्या रहती थी, अब बिल्कुल नहीं। अब छात्राओं को भी फिटनेस के लिए प्रेरित करती हूं कि स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है।
- रागिनी गुरुदेव
स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी
पहले महिलाओं की भागीदारी सीमित थी, पर अब वे बराबरी से जिम आ रही हैं। घरेलू महिलाएं, छात्राएं और प्रोफेशनल्स सभी फिटनेस को प्राथमिकता दे रही हैं। यह बदलाव समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ने का सकारात्मक संकेत हैं। जो महिलाएं जिम नहीं आ सकती हैं वह तेज वाॅक और खड़े होकर वर्क आउट घर पर ही कर सकती हैं। जीवन में स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है।
- आशीष शुक्ला, जिम ट्रेनर नियो जिम हार्पर क्लब
फोटो - 02 जिम में अभ्यास करतीं महिलाएं। संवाद
फोटो - 02 जिम में अभ्यास करतीं महिलाएं। संवाद
फोटो - 02 जिम में अभ्यास करतीं महिलाएं। संवाद
फोटो - 02 जिम में अभ्यास करतीं महिलाएं। संवाद