बांदा। क्षेत्र पंचायतों की सत्ता हथियाने के लिए
चुनावी घमासान में रविवार को मतदान होगा। महुआ ब्लाक में निर्विरोध
निर्वाचन के बाद सात ब्लाकों में 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।
इनमें
इक्का-दुक्का को छोड़कर ज्यादातर सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस समर्थित
हैं। बड़ोखर, नरैनी, बबेरू, तिंदवारी और बिसंडा में दो-दो प्रत्याशी होने
से मुकाबला आमने-सामने का है। कमासिन ब्लाक में तीन प्रत्याशी हैं।
बड़ोखर
ब्लाक में सपा के रामऔतार यादव और भाजपा के विशंभर सिंह लालू के बीच सीधा
मुकाबला है। जसपुरा ब्लाक में भी सपा की सादिका खातून और बसपा के दीपक सिंह
गौर आमने-सामने हैं।
बबेरू में सपा की सुमन देवी और बसपा की
शिरोमणि के बीच मुकाबला है। तिंदवारी सपा विधायक विशंभर सिंह यादव की
पुत्रवधू अंकिता यादव सपा से और सुनीता यादव भाजपा से चुनाव मैदान में हैं।
नरैनी में सपा के अवधेश कुमार सिंह और बसपा की मंजू त्रिपाठी के
बीच टक्कर है। बिसंडा ब्लाक में सपा की कलमतिया यादव और निर्दलीय रन्नो
देवी के बीच मुकाबला है।
कमासिन ब्लाक में सपा की नीलम वर्मा, बसपा
की मिथलेश कुमारी और निर्दलीय छिद्दी देवी चुनावी जंग में हैं। महुआ ब्लाक
में सपा की शशि यादव निर्विरोध निर्वाचित हो गईं।
तीन ब्लाकों में चार प्रत्याशी चुनाव मैदान से खींचे पाव
बांदा।
शुक्रवार को नामांकन किया और शनिवार को वापस ले लिया। ब्लाक प्रमुख के
चुनाव में ताल ठोककर पर्चा दाखिल करने के बाद चार प्रत्याशियों के हौसले
रातोंरात पस्त हो गए।
वे खुद हटे या हटाए गए? यह कोई स्पष्ट नहीं
बता रहा। बड़ोखर खुर्द और जसपुरा में दो-दो तथा नरैनी ब्लाक में एक
प्रत्याशी ने चुनाव मैदान छोड़ दिया है।
बड़ोखर में शेखर शर्मा और
राजेश सिंह ने नाम वापस लिए। राजेश इसी ब्लाक से भाजपा प्रत्याशी विशंभर
सिंह के भाई बताए गए हैं। दूसरे प्रत्याशी शेखर शर्मा के तार सपा से जुड़े
हैं। उनके बड़े भाई दिनेश शर्मा भी सपा नेता हैं।
चर्चा है कि
सपाइयों ने उन पर जमकर दबाव बनाया। उधर, जसपुरा ब्लाक में नाम वापस लेने
वाली श्वेता सिंह गौर इसी ब्लाक से बसपा समर्थन पर चुनाव लड़ रहे दीपक सिंह
गौर की पत्नी हैं। नरैनी मेें घनश्याम सोनी ने नाम वापस ले लिया है।