बांदा। गरीबी, तंगहाली, कर्ज और आत्महत्याओं के लिए
चर्चित पड़ुई गांव के बाशिंदों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके गांव
में ‘व्हाइट हाउस’ बनेगा।
सूबे का सबसे बड़ा अफसर उनके गांव में
रात बिताएगा। रोजाना अंधाकुप में जीने के आदी हो चुके पड़ुई वाले आज चारों
तरफ बिजली की रोशनी से हक्का-बक्का थे। खुशी और हैरत ने उनकी आंखों से नींद
उड़ा दी।
पड़ुई गांव में दाखिल होते ही बाईं तरफ जूनियर और
प्राइमरी स्कूल भवन है। इनका लंबा-चौड़ा खुला परिसर है। इसी में मुख्य सचिव
आलोक रंजन के रात्रि विश्राम और चौपाल का इंतजाम किया गया।
उनके
रात में सोने के लिए 16 फिट चौड़ी 24 फिट लंबी ‘स्विस काटेज’ बनाई गई है।
इसे लखनऊ से आए कारीगरों ने तैयार किया है। पूरा काटेज लकालक सफेद बनाया
गया।
नीचे जमीन पर कारपेट बिछाकर उस पर सफेद चादर बिछाई गई। सामने ही दो सीटों का महराजा सोफा था। इसमें भी सफेद चादर डाली गई।
बाएं
हाथ के कोने पर रखी मेज पर सफेद मेजपोश और उसके ऊपर एलईडी (टीवी) रखी थी।
दाहिनी तरफ नए तखत पर गद्दे और सफेद बेडशीट बिछाकर मुख्य सचिव के लिए
आरामदेह बिस्तर तैयार किया गया है।
दूधिया सफेद रोशनी फैलाने वाली
दो सीएफएल लगाई गई हैं। कपड़े टांगने के लिए एक हैंगर टांगा गया। स्विस
काटेज पीडब्ल्यूडी ने तैयार कराया।
इससे अटैच लैट्रीन, बाथरूम
पक्के बनवाए गए हैं। पानी के लिए बाहर जल संस्थान ने दो टैंकर खड़े किए थे।
‘व्हाइट हाउस’ के चारों तरफ हाईलोजन लाइटें लगाकर दमकती रोशनी की गई।
इसी
से चंद कदम दूर स्कूल परिसर में ही सफेद पंडाल तले चौपाल का इंतजाम रहा।
सामने टेबिल के पीछे बीच में मुख्य सचिव की खास कुर्सी रखी थी। दाएं-बाएं
15 कुर्सियां रखी गईं, जिनमें अन्य अफसर विराजमान हुए।