फोटो - 01 कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक करते एडीएम कुमार धर्मेंद्र। स्त्रोत : सूचना विभाग
बांदा। देश की पहली और पूरी तरह डिजिटल जनगणना में घर के चौके से लेकर शौचालय तक की खबर ली जाएगी। गृह स्वामियों को बताना होगा कि वह कौन सा अनाज ज्यादा खाते हैं और किस प्रकार के शौचालय का इस्तेमाल करते हैं। घर-परिवार का पूरा चिट्ठा खोलने वाले कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे। हालांकि ये सब गोपनीय रखे जाएंगे।
जनगणना का पहला चरण पहली अप्रैल से शुरू हुआ है और सितंबर तक चलेगा। इसमें मकानों की सूची और परिवारों के रहन-सहन के तौर तरीके का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी से शुरू होगा। इसमें परिवारों की सामाजिक, आर्थिक और जातिगत स्थिति दर्ज की जाएगी। गणनाकर्मी घर-घर दस्तक देंगे और परिवार के मुखिया से कुल 33 सवाल करेंगे।
इसमें यह भी पूछेंगे आपका परिवार कौन सा अनाज मुख्य रूप से खाता है, घर में कैसा शौचालय इस्तेमाल करते हैं, देसी या विदेशी शैली का। यह भी बताना होगा कि मकान की दीवारें और फर्श किस मटेरियल ( निर्माण सामग्री) से बना है। मकान का मालिक कौन है। घर में कितने लोग शादीशुदा हैं। रसोई में कौन सा ईंधन (एलपीजी या पीएनजी) इस्तेमाल होता है। टीवी, रेडियो, इंटरनेट, लैपटॉप, कंप्यूटर, दो पहिया या चार पहिया वाहन है या नहीं। पानी-बिजली कैसे और कहां से मिल रही है। इन सवालों के अलावा अपनी जाति भी बताना होगी।
सात से 21 मई तक स्वगणना का मिलेगा विकल्प
जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। जिसका पहला चरण 22 मई 2026 से 20 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में मकान सूचीकरण और गणना के रूप में होगा। इस बार सीएमएमएस वेब पोर्टल का उपयोग किया जाएगा और नागरिकों को 7 से 21 मई 2026 तक स्व-गणना का विकल्प मिलेगा। अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेंद्र ने प्रशिक्षण, मकान सूचीकरण और समयबद्ध फील्ड कार्य पर जोर देते हुए किसी भी विलंब पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। यह डिजिटल जनगणना मोबाइल ऐप के माध्यम से 33 प्रकार की जानकारी एकत्र करेगी। अधिशासी अधिकारी और तहसीलदार चार्ज अधिकारी होंगे। जिनकी जिम्मेदारी में 22 अप्रैल से प्रगणकों व सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत यह कार्य गोपनीय रखा जाएगा, जिसमें ग्राम प्रधानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।