बांदा। शहर में जहां पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन नहीं है या फिर कम है, वहां भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आ रही है। इन क्षेत्रों में भूजल पर निर्भरता बढ़ रही है। लोग सबमर्सिबल लगाकर पानी का दोहन कर रहे हैं, जबकि जल संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग लगाने में लापरवाही की जा रही है
शहर की करीब ढाई लाख की आबादी को पानी की आपूर्ति के लिए केन नदी ही सहारा है। मौजूदा समय में पूरे शहर में 24 घंटे में सिर्फ एक घंटे या 40 मिनट ही आपूर्ति की जाती है। जहां पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन नहीं है या कम है, वहां लोगों की भूजल पर निर्भरता बढ़ी है। सबमिर्सबल लगाकर अत्यधिक भूजल दोहन किया जा रहा है। इससे शहर क्रिटिकल सेमी में पहुंच रहा है। भूजल संरक्षण को लेकर होटल, माॅल व अन्य व्यवसायिक भवनों में कोई पहल नहीं की जा रही है।
शहर में 60 से ज्यादा मिनिरल वाटर प्लांट व सर्विस सेंटर संचालित हो रहे हैं। यह भी मानक पूरा नहीं कर रहे हैं। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन से ज्यादातर मोहल्लों में लोगों को बोरिंग में दो-दो साल में 10-10 मीटर के पाइप डलवाने पड़ रहे हैं। पुरानी बोरिंग फेल हो रही हैं। 2019 के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं।
वर्जन
-भूगर्भ जल स्तर में पहले की तुलना में ज्यादा गिरावट दर्ज की जा रही है। इसे बचाने के लिए न सिर्फ भूगर्भ जल पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी, बल्कि वर्षा जल संचयन बढ़ाना पड़ेगा।- -स्वप्निल सिंह, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ जल विभाग
इन मोहल्लों में लुढ़का भूगर्भ जल स्तर
स्थान 2018 में भूगर्भ जल स्तर मौजूदा स्थिति
अलीगंज 6.45 मीटर 7.68 मीटर
मर्दननाका 7.55 मीटर 8.93 मीटर
जीआईसी 9.47 मीटर 10.50 मीटर
स्टेडियम 5.55 मीटर 7.22 मीटर
मंडी समिति 7.95 मीटर 11.55 मीटर
कचहरी 7.50 मीटर 11.40 मीटर