Where did 200 cows go, MP teams started searching
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नरैनी/करतल (बांदा)। दफन 18 गायों को निकलाकर उनका पोस्टमार्टम करवाने के बाद अब मध्य प्रदेश पुलिस और प्रशासन लगभग दो सौ उन गायों की खोज में जुट गया है, जिन्हें नरैनी (बांदा) के अधिकारियों ने उनके क्षेत्र की घाटी के जंगल में रात में छोड़ दिया था।
अन्ना गायों के प्रति नरैनी के प्रशासनिक, परिवहन और नगर पंचायत अधिकारियों की ओर से की गई क्रूरता को पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के अफसर भी धिक्कार रहे हैं। पन्ना के एसडीएम सत्यनारायण ने बताया कि शेष गायों की खोज के लिए टीमें लगाई गई हैं। यह इलाका बाघ बाहुल्य पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क से जुड़ा हुआ है। ऐसे में छोड़ी गई गायें इन जानवरों का शिकार हो सकती हैं।
मध्य प्रदेश की घाटी में छोड़ी गईं घायल गोवंश में दो की और मौत हो गई। पत्थरों में दबी इन गायों को क्षेत्रीय विधायक राजकरन कबीर और गोसेवक वहां से नरैनी लाए थे। इनका यहां इलाज चल रहा था। इसी तरह 7 दिसंबर को विधायक एक और घायल गाय को लाए थे। इनका इलाज और देखरेख गोरक्षक विनोद दीक्षित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को दो गायों की मौत हो गई। उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इन्हें मिलाकर अब तक 20 गायों की मौत की पुष्टि हो गई है।
गोवंश को जीवित अवस्था में दफनाने और जंगल में लावारिस छोड़ने का विरोध मध्य प्रदेश में भी शुरू हो गया है। पन्ना जनपद के बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को पहाड़ीखेरा पुलिस चौकी प्रभारी को तहरीर दी। कहा कि अराजकता फैलाने की मंशा से गायों को मारकर सड़क किनारे दफना दिया गया। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। तहरीर देने वालों में बजरंग दल के क्षेत्रीय संयोजक अंकित कुमार उमरलिया, सह संयोजक शरद पांडेय, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष सूर्य प्रताप सिंह बुंदेला, गौरक्षा प्रमुख दिलीप त्रिपाठी आदि शामिल रहे।