कथा सुनाते प्रेम भूषण महराज।
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कथावाचक प्रेम भूषण महराज ने तीसरे दिन भगवान की बाल लीला का प्रसंग सुनाया। कहा कि प्रेम सदैव समर्पण चाहता है। प्रेम तो केवल मां और गुरु का नि:स्वार्थ होता है।
छिबांव (खुरहंड रेलवे स्टेशन) में डीडीसी सरिता द्विवेदी के आवास पर चल रही श्रीराम कथा में उन्होंने कहा कि भक्त जिस स्वरूप में प्रभु को चाहता है, प्रभु भी वही स्वरूप धारण करके प्रत्यक्ष हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा प्रेम कोई किसी से नहीं करता है। केवल स्वार्थवश प्रेम करता है। सिर्फ मां और गुरु का प्रेम नि:स्वार्थ होता है।
यजमान रामजश द्विवेदी, भाजपा नेता प्रकाश द्विवेदी, सुशील द्विवेदी आदि ने व्यास पीठ की आरती उतारी।विजय सिंह, उमेश मिश्रा, बुद्धराज सिंह, रामभवन उपाध्याय, बालमुकुंद शुक्ला, इंद्रपाल पटेल, आनंद शुक्ला, संतोष गुप्ता, अभिषेक शुक्ला, रजत सेठ, मयंक गुप्ता, रामजी, श्याम,मुकुंदलाल आदि का सहयोग रहा।