बांदा। बुंदेलखंड में वनों का विनाश और कोविड-19 विषय पर आयोजित वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए स्वामी मदन गोपाल दास महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण के सभी रूप जल, जंगल, जमीन, पहाड़ आदि को बचाने की सख्त जरूरत है। बुंदेलखंड में खासतौर पर चित्रकूट की मंदाकिनी नदी अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए जल के स्रोत पहाड़ को सुरक्षित करना जरूरी है।
उन्होंने संत समाज और स्थानीय लोगों को आगे आने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता प्रेमचंद अनुरागी ने कहा कि हमें सड़क तो चाहिए पर पेड़ों को काटकर नहीं। कहा कि वर्तमान समय में विकास के नाम पर विनाश ही किया जा रहा है। डॉ. अंजलि केसरी ने कहा कि बच्चों को प्रकृति पर्यावरण के प्रति जागरुकता के लिए उन्हें ट्रेनिंग प्रोग्राम इंटर्नशिप की जरूरत है। उन्हें पहाड़, तालाब, झील आदि को बचाने के लिए प्रेरित करना होगा। विशिष्ट वक्ता और पानी कार्यकर्ता रामबाबू तिवारी ने कहा कि केन बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व में लाखों की संख्या में वृक्ष डूब जाएंगे। छतरपुर में बक्सवाहा के जंगल को हीरा खदान के लिए नीलाम कर दिया गया है। यहां भी लाखों वृक्ष तबाह हो जाएंगे।
खनन को लेकर बुंदेलखंड में पहाड़ों का विनाश किया जा रहा है। साथ ही साथ जंगलों का विनाश भी किया जा रहा। बुंदेलखंड में आने वाले समय में भयंकर सूखा, अकाल पड़ेगा। भुखमरी को सामना करना पड़ेगा। बुंदेलखंड के जंगलों को बचाने के लिए उत्तराखंड की तर्ज पर यहां भी चिपको आंदोलन चलाने की जरूरत है। कोविड-19 खत्म होते ही इसकी शुरुआत होनी चाहिए। छतरपुर के सामाजिक कार्यकर्ता पवन रावत ने कहा कि अवैध खनन से बुंदेलखंड की तबाही की गाथा रची जा रही है। सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विजय कश्यप ने कहा कि जंगल की लड़ाई हम कोर्ट के माध्यम से भी लड़ेंगे। वेबिनार का संचालन रजनीश अवस्थी ने किया। इस मौके पर डॉ. प्रिया सिंह, रितेश मौर्य, नम्रता अहिरवार, हरदेव सिंह, नारायण दत्त व मुलायम यादव आदि शामिल रहे।