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लॉकडाउन में परेशान किसानों पर मौसम ने जड़ा तमाचा

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आंधी में उड़कर खलिहान से खेतों में जा गिरे गेहूं की कटी फसल के पूले। - फोटो : BANDA
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बांदा। लॉकडाउन में खेती-किसानी की तमाम बंदिशें झेल रहे किसानों पर कुदरत भी खफा है। अब जबकि खेत और खलिहानों में फसलें तैयार हैं तो कई दिनों से रोजाना आंधी-बारिश और ओलावृष्टि कहर ढा रही है। दो दिन की इस दैवी आपदा ने किसानों को भारी चपत लगाई है। जिले के अतर्रा, नरैनी आदि क्षेत्रों में 70 से 80 फीसदी तक फसलों को नुकसान बताया गया है। दूसरी तरफ कृषि विभाग यह दलील दे रहा है कि फसलें कटकर किसानों के घर पहुंच गई हैं। कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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किसानों ने इस वर्ष रिकार्ड तोड़ सर्वाधिक 3.24 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं, दलहन और तिलहन की बुआई की थी। मानसूनी मौसम में बारिश अच्छी होने से किसानों की मेहनत रंग लाने के पूरे आसार थे, लेकिन फरवरी से ही मौसम की मार शुरू हो गई। बेमौसम आंधी-बारिश और ओलावृष्टि शुरू हो गई। यह सिलसिला मार्च में भी नहीं थमा।
अब अप्रैल में भी जारी है। पिछले दो दिनों से लगातार तेज बारिश, आंधी और ओला से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। नरैनी, अतर्रा, पैलानी में गेहूं, जौ, अरहर को 70 से 80 फीसदी तक नुकसान बताया गया है। खेत में खड़ी फसल मिट्टी में मिल गई है। इन क्षेत्रों में करीब 84 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें अभी खेत में ही खड़ी हैं।
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लॉकडाउन में मजदूर न मिलने से इनकी कटाई नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ कृषि उप निदेशक एके सिंह का कहना है कि 95 फीसदी फसल कट चुकी है। फसल को कोई नुकसान नहीं है। अलबत्ता मड़ाई का काम एक सप्ताह पिछड़ सकता है।
आंधी से आम की 80 फीसदी फसल नष्ट
बांदा। आंधी-बारिश की सबसे ज्यादा मार आम पर पड़ी है। इस वर्ष अच्छी बौर आने से आम की पैदावार के अच्छे आसार थे। ज्यादातर पेड़ आम से लदे थे, लेकिन दो दिनों में आई तेज आंधी और ओला-बारिश से पेड़ों पर झूल रहे आम जमींदोज हो गए। आम बागवानों के चेहरों की खुशियां काफूर हो गई। कृषि विभाग के मुताबिक जनपद में लगभग 1800 हेक्टेयर में आम की बागवानी होती है। जिला उद्यान अधिकारी परवेज खां ने बताया कि बड़ोखर खुर्द, तिंदवारी, अतर्रा और बिसंडा में आम का सर्वाधिक उत्पादन होता है।
देर से बोई फसल कटना बाकी
बांदा। बड़ोखर गांव के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह का कहना है कि जनपद में देर से बोई गई करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसल कटना बाकी है। दो दिन की आंधी, बारिश व ओलावृष्टि से भारी क्षति हुई है। उधर, आम की फसल को भी 70 से 80 फीसदी नुकसान हुआ है।
दाने काले पड़कर सिकुड़ जाएंगे
बांदा। छनेहरा लालपुर गांव के प्रगतिशील किसान असलम खां का कहना है कि आंधी और बारिश से खेत में खड़ी फसल गिर गई। रही-सही कसर ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। खलिहान में कटी फसल में बारिश से दाने काले पड़कर सिकुड़ जाएंगे। खरीद केंद्रों में इसे नहीं खरीदा जाएगा।

प्रेम सिंह।- फोटो : BANDA

असलम खां।- फोटो : BANDA

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