बांदा। केंद्र सरकार की एक अगस्त (आज) से शुरू होने वाली मौसम आधारित स्वैच्छिक फसल बीमा योजना में बुंदेलखंड के दो महत्वपूर्ण जनपदों बांदा और चित्रकूट का पत्ता साफ कर दिया गया है। इससे दोनों जिलों के बागवानी करने वाले किसानों में मायूसी है। योजना देश के 64 जिलों और बुंदेलखंड के पांच जिलों हमीरपुर, महोबा, ललितपुर, जालौन और झांसी में शुरू हो रही है।
केंद्र सरकार ने पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू कर दी है। इसके लिए बीमा प्रीमियम जमा करने की तिथियां भी घोषित कर दी हैं। किसानों को ऑनलाइन प्रीमियम जमा करने की भी सुविधा दी गई है। योजना में सात फसलों केला, आम, शिमला मिर्च, टमाटर, पान, हरा मटर और मिर्च को शामिल किया गया है।
बुंदेलखंड के पांच जनपदों झांसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर और महोबा योजना में शामिल किए गए हैं, लेकिन जनपद बांदा व चित्रकूट को शामिल नहीं किया गया, जबकि इन दोनों जिलों में बडे़ पैमाने पर बागवानी होने के बाद भी शासन के मानक में यह खरे नहीं उतरे, जिससे दोनों जिलों के बागवानी किसान निराश हैं।
वहीं उद्यान विभाग के आंकडे़ बताते हैं कि बांदा में 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में टमाटर, मिर्च, शिमला मिर्च और 50 हेक्टेयर में आम का उत्पादन होता है। शासन की इस अनदेखी से बांदा और चित्रकूट के बागवानी किसान क्षुब्ध हैं।
अधिकतम दो हेक्टेयर तक की फसल का बीमा
जिला उद्यान अधिकारी परवेज खा ने बताया कि किसान की अधिकतम दो हेक्टेयर तक की फसल का बीमा होगा। फसलवार अलग-अलग जोखिम बीमा राशि निर्धारित की गई है। किसान को बीमा राशि का पांच फीसदी प्रीमियम देना होगा। दैवी आपदा बाढ़, अग्निकांड, बारिश, ओलावृष्टि आदि से होने वाले नुकसान का बीमा कंपनी भरपाई करेंगी। बताया कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना इस वर्ष पहली अगस्त से लागू होगी।
फसलवार जोखिम कवरेज तिथियां
मौसम आधारित फसल बीमा योजना में अलग-अलग फसल के लिए जोखिम करवेज की तिथि निर्धारित की गई है। केला की बीमा अवधि एक जुलाई से 30 सितंबर, मिर्च की पहली अगस्त से 31 अक्तूबर, टमाटर व शिमला मिर्च की पहली दिसंबर से 31 मार्च, हरी मटर की 15 दिसंबर से 28 फरवरी, आम की 16 दिसंबर से 31 मार्च जोखिम कवरेज तिथि होगी। ऋणी किसानों का बैंक में स्वत: बीमा हो जाएगा। यदि कोई किसान बीमा नहीं चाहता है तो उसे बैंक को लिखकर देना होगा, ताकि उनके खाते से प्रीमियम की राशि न काटी जाए।
मौसम का आंकड़ा मिलते ही दावा, 45 दिनों में भुगतान
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल योजना का लक्ष्य वर्षा, तापमान, हवा, नमी आदि से संबंधित प्रतिकूल मौसम से संभावित फसल के होने वाले वित्तीय नुकसान की संभावना से बीमा कराए किसानों की कठिनाई को कम करना है। क्षतिपूर्ति करने में कृषि उत्पाद के लिए मौसम पैरामीटर को प्राक्सी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
मौसम ट्रिगर का उपयोग करते हुए अनुमानित हानियों की सीमा तक भुगतान ढांचे को विकसित किया जाता है। मौसम से संबंधित आंकड़ा मिलते ही दावे की प्रक्रिया जारी की जाती है। जोखिम अवधि समाप्त होने के 45 दिनों के अंदर सभी मानक दावों पर कार्रवाई करते हुए भुगतान किया जाता है।