फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सूखी धरती में पानी की धार, सूखे में भी फसल तैयार

Sun, 24 Apr 2016 11:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
विज्ञापन
बोरिंग के पानी से खेत की सिंचाई करता किसान राजाभइया पटेल। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
बांदा। सूखे बुंदेलखंड में जहां चारों तरफ बंजर धरती से धूल उड़ रही है वहीं एक अनपढ़ वृद्ध किसान ने उम्मीद की नई मशाल जलाकर सूखे और दैवी आपदा के नाम पर सिर्फ हाय तोबा मचाने और हाथ खड़े कर देने वालों को सुखद संदेश दिया है। बैंक से कर्ज लेकर खेत में बोरिंग कराई और फिर सौर ऊर्जा प्लांट लगाकर बिजली से मोटर चलाई। नतीजे मेें अब 24 घंटे मनचाही पानी की धार खेत मेें बह रही है। आसपास चारों तरफ के खेत जहां सूखे और वीरान पड़े हैं वहीं इस किसान के खेत में अरहर और मसूर लहलहा रही है।
विज्ञापन


मौसम की मार से मायूस होकर घर बैठने वाले किसानों के लिए नरैनी तहसील के सुदूर महाराजपुर गांव में किसान राजाभइया पटेल प्रेरणा का रूप साबित हुआ है। मुख्य सड़क किनारे उसका लगभग 10 बीघा खेत है। बारिश न होने से उसके और आसपास दूर-दूर तक के खेत परती पड़े थे। वृद्ध राजाभइया को कहीं से यह सलाह मिली की खेत में बोरिंग कराकर पंप (मोटर) लगा ले। पानी की भरमार हो जाएगी। बोरिंग तो आसान थी, लेकिन पंप चलाने के लिए बिजली मयस्सर होना दुर्लभ काम था। पढ़े-लिखे न होने के बावजूद राजाभइया ने दो माह तक बैंक के चक्कर लगाकर बोरिंग और बिजली के लिए सौर ऊर्जा प्लांट मंजूर करा लिए। खेत में बोरिंग कराकर समर्सिबल पंप लगा दिया।

खरपैलदार झोपड़ी बनाकर नजदीक में तीन सौर ऊर्जा की प्लेटेें लगवा दी। इन प्लेटोें से उसे भरपूर बिजली मिल रही है। तीन इंच पाइप से मनचाहा पानी निकल रहा है। जिस खेत में कुछ दिनों पहले धूल उड़ रही थी अब वहां ज्वार और मसूर के हरे-भरे पौधे लहलहा रहे हैं। आसपास के खेतों में अन्य फसल उगाने के लिए इन दिनों राजाभइया क्यारियां बनाकर खेत में पानी भर रहा है। इस काम में उसकी मदद उसकी पत्नी और युवा पुत्र कर रहे हैं। राजाभइया ने बताया कि बैंक ने उसे एक लाख 70 हजार की लागत में यह प्लांट लगाया गया है। उसने बताया कि बैंक वालों ने 600 रुपये ‘बैंक खर्च’ बताकर ऐंठ लिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


                                       
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें