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महिला हिंसा में सजा हुईं सख्त

Sat, 13 Aug 2016 11:03 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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संबोधित करते एडीजी अविनाश चंद्रा। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। महिला अपराधों पर हो रही किरकिरी के बाद जागी पुलिस ने मंडल मुख्यालय स्तर पर पुलिस को जगाने का काम शुरू कर दिया है। शनिवार को लैंगिक संवेदनशीलता पर आयोजित कार्यशाला में पुलिस अपर महानिदेशक अविनाश चंद्रा ने कहा कि एसिड अटैक में अब 10 वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकेगी। आईपीसी में यह संशोधन किया गया है।
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कृषि विश्वविद्यालय सभागार में मंडलस्तरीय कार्यशाला में मंडलायुक्त, डीआईजी समेत चारों जिलों के पुलिस अधीक्षक और हरेक थाने से उप निरीक्षक और पुलिस कर्मी शामिल हुए। एडीजी ने कहा कि महिलाओं पर होने वाले अपराधों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सजा में भी कड़ाई की गई है। बताया कि आईपीसी की धाराओं में कई संशोधन हुए हैं। एसिड अटैक में आरोपी को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

एसिड अटैक का प्रयास करने में पांच वर्ष या उससे ज्यादा जेल हो सकती है। बताया कि बलात्कार के मामलों में भी सजाएं सख्त की गई हैं। जुर्म सिद्ध होने पर सात वर्ष से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। महिलाओं से छेड़छाड़ या डराने पर पांच वर्ष तक जेल काटनी पड़ सकती है।
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मंडलायुक्त एल. वेंकटेश्वर लू ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं या गोष्ठियां पुलिस तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। ऐसे आयोजनों में सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों, महिला संगठनों, व्यापार मंडल और छात्र-छात्राओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे भी जागरूक हो सकें। डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी ने कहा कि महिला अपराधों को हल्के में न लें।

महिलाओं की किसी भी शिकायत पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करे। डीएम योगेश कुमार, एसपी राजेंद्र प्रसाद पांडेय, कुलपति प्रो. एसएल गोस्वामी, एसपी चित्रकूट केशव कुमार चौधरी, एसपी महोबा गौरव सिंह, जेेएन डिग्री कालेज प्राचार्य डॉ. नंदलाल शुक्ला, राजकीय महिला डिग्री कालेज प्राचार्य प्रभा श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।

दूसरे सत्र में लैंगिक विषमता एवं महिला सशक्तीकरण पर डॉ. सबीहा रहमानी, लैंगिक विषमता एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा विषय पर डॉ. निर्मला शर्मा और लैंगिक विभेद के निवारण हेतु संवैधानिक एवं कानूनी अधिकार विषय पर वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र सिंह सेंगर ने विचार रखे।

तीसरे सत्र में महिला सुरक्षा से संबंधित चलाए जा रहे विभिन्न पहल पर डॉ. शशिभूषण मिश्र और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा निवारण में पुलिस की भूमिका पर एएसपी मायाराम वर्मा ने विचार रखे। अंतिम सत्र में जिला शासकीय अधिवक्ता कैलाश चौबे ने महिलाओं और बालिकाओं के प्रति अपराधों की रोकथाम के लिए न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी दी। उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी एसएन त्रिपाठी ने बताया कि महिला चिकित्सालय में खुले वन स्टाफ सेंटर खुला है। मोबाइल नंबर 9559081762 पर प्रशासक अंजू दीक्षित को जानकारी देकरर पीड़ित महिला सहायता ले सकती है।

कार्यशाला में भी सोती रही पुलिस
महिला अपराधों पर सोती पुलिस को जगाने को कार्यशालाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस की नींद खत्म ही नहीं होती। हद तो तब हो गई जब एडीजी की उपस्थिति में हुई कार्यशाला में भी पुलिस वाले सोते रहे। एडीजी को माइक पर कहना पड़ा कि चार-पांच घंटे की कार्यशाला में आप लोग सो रहे हैं। सोना ही है तो कार्यशाला से बाहर चले जाएं। एडीजी की खरी-खरी सुनते ही पुलिस कर्मियों की नींद उड़ गई। हड़बड़ा कर कुर्सियों पर सीधे बैठ गए।
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