धान की पौध का निरीक्षण करते कृषि वैज्ञानिक जितेंद्र सिंह व अन्य।
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बांदा। जिले में कृषि की असीम संभावनाएं हैं, पर बिना जानकारी किसान अच्छी उपज नहीं ले पा रहे हैं। 65-70 फीसदी वर्षा आधारित खेती को दो फसली और उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीकी प्रसार की जरूरत है। ये बातें कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीके शर्मा ने कही।
कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने खेतों में जाकर किसानों को तकनीकी जानकारी दी। फसलों के चयन के बारे में बताया। गुरेह गांव में किसान जंग बहादुर सिंह के यहां धान की खेती का जायजा लेने आए डॉ. वीके शर्मा और कृषि विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। जंग बहादुर आंवला के बाग के बीच धान की खेती भी कर रहे हैं। कहा कि किसान पोषक रसोई बागवानी करें।
घरों में ही छोटी क्यारी बनाकर उसमें गोबर खाद का प्रयोग कर सब्जी उगाएं। इसमें पपीता, नींबू के एक-एक पौधे लगाएं। एक सब्जी फसल खत्म होने के पहले दूसरी बुवाई कर दें। कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि अतर्रा ग्रामीण के किसान शाहिद अली ने अगेती और नई प्रजातियों की सब्जी का अच्छा उत्पादन किया है। हटेटी पुरवा के किसान लल्लन मंसूरी ने बारिश के जल को संरक्षित कर सब्जी, मछली और बकरी पालन कर प्रेरणास्रोत बने हैं।
मर्दननाका के अजीज बेग ने मुर्गी पालन, सब्जी और जैविक खेती कर लाभ कमा रहे हैं। साड़ासानी के किसान नंदलाल सिंह बागवानी कर रहे हैं। बरगहनी गांव में किसान राकेश सिंह तकनीक अपनाकर नई प्रजातियों की फसलें व सब्जी उगा रहे हैं। डॉ. मुलायम सिंह परिहार, डॉ. पृथ्वीपाल की टीम गांव-गांव किसानों को अत्याधुनिक व जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।