फसलों पर पड़ी कुदरत की मार से पाई-पाई को मोहताज हो जाने के बावजूद दो किसानों की बेटियां दुल्हन बनेंगी। ‘साथी साथ निभाना’ की परंपरा फिर जीवित करते हुए गांव के लोगों ने इन बेटियों की शादी का जिम्मा खुद संभाल लिया है। नरैनी क्षेत्र के रानीपुर गांव में 25 मई और 11 जून को दो दुल्हनों की डोलियां उठेंगी।
नरैनी क्षेत्र के दोआब क्षेत्र में यूं भी किसान खुशहाल नहीं हैं। पिछले दिनों बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि ने इन किसानों को बर्बाद कर दिया। अच्छी फसल की उम्मीद में रानीपुर गांव में दो बीघा के काश्तकार श्रीराम ने अपनी बेटी गौरी की शादी 25 मई को तय कर दी थी।
लड़का पन्ना (एमपी) के हरनामपुर का रहने वाला है। फसल के दगा दे जाने से श्रीराम की हिम्मत भी जवाब दे गई। उसने बेटी की शादी टाल देने का फैसला कर लिया। गांव के मातादीन, संतोष, मूलचंद्र और अतर्रा के दिनेशपाल सिंह आदि को यह पता चला तो उन्होंने गौरी की शादी को गांव की प्रतिष्ठा से जोड़ दिया।
उन्होंने शादी की तैयारियां शुरू कर दीं। हालांकि फिजूलखर्ची रोकने का संकल्प लिया गया। उधर, इसी गांव में किसान मोहन प्रजापति के पास सिर्फ 14 बिस्वा जमीन है। पति-पत्नी खेती के साथ मजदूरी भी करते हैं। फसल की उम्मीद टूट जाने पर इन्होंने अपनी बेटी फूला की 11 जून को होने वाली शादी टालने का फैसला कर लिया।
पिता मोहन मानसिक रोगी हैं। फूला के हाथ पीले करने के लिए पड़ोसी गांव मोहनपुर के अध्यापक यशवंत पटेल और उनकी पत्नी सुमनलता पटेल आगे आए हैं। उन्होंने शादी की पूरी जिम्मेदारी ले ली है।
11 जून को बारात आएगी। इन दोनों बेटियों की शादी में सामाजिक कार्यकर्ता राजीव लोक नायक यादव (गाजियाबाद) भी मददगार बन गए हैं। प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर ने बताया कि उनके सहित कई अन्य समाजसेवी किसानों की इन दोनों बेटियों की शादी में हरसंभव मदद कर रहे हैं।