बांदा। मुख्यालय के नजदीक स्थित केन नदी की मरौली बालू खदान के रास्ते में बुधवार की रात एक ओवरलोड बालू ट्रक के खराब होने से भीषण जाम लग गया। बुधवार की रात से लगा जाम बृहस्पतिवार की सुबह करीब 12 घंटे बाद खुल सका। इस दौरान दोनों ओर से काफी दूर तक वाहनों की लाइनें लगी रहीं। मौके पर पहुंची पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद जाम को खुलवाने में सफल रही।
मरौली गांव में कई बालू की खदानों का संचालन होता है। यहां से सैकड़ों ओवरलोड ट्रक रोजाना बालू भरकर निकलते हैं। बुधवार की रात खदान के रास्ते में एक ओवरलोड ट्रक खराब हो गया, जिससे रास्ता ठप हो गया। इस दौरान ट्रकों की लंबी लाइनें काफी दूर तक लग गईं। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और जाम खुलवाने की कोशिश करने लगी, लेकिन रातभर वाहन सवार जाम से जूझते रहे। रास्ता न खुलने से रातभर ट्रक चालक और क्लीनर खदान के रास्ते में जंगल में पड़े रहे। काफी मशक्कत के बाद किसी तरह से बृहस्पतिवार को सुबह जब रास्ता खुला, तब बालू भरे ट्रकों का रेला रवाना हुआ। इस बीच खनिज विभाग या प्रशासन का कोई अधिकारी यहां झांकने भी नहीं गया।
रातभर रास्ता जाम रहने से गांव के लोगों को भी आवागमन में भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि खदान वाले रास्ते में जाम लगा था। सुबह ट्रकों के एक साथ निकलने से खेती के लिए किसान नहीं जा पाए। रास्ता खाली होने पर ही वह वहां से गए। उधर, मंडल मुख्यालय की नाक तले केन नदी में ही मुख्य जलधारा में आरपार पुल/रास्ता बना लिया गया है। इससे दिन-रात बालू समेत अन्य वाहन निकाले जा रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में इस मार्ग से होकर लोग गुजरते हैं। खनिज विभाग या प्रशासन खामोश है।
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बालू कारोबार को परवान चढ़ा रहा नाइट कर्फ्यू
बांदा। कोरोना काल में रात्रिकालीन कर्फ्यू भले ही आम आदमियों और व्यापारियों के लिए आर्थिक घाटे का सौदा साबित हो रहा है, लेकिन बालू खदान संचालकों और ढुलान करने वाले ट्रकों के लिए यह सोने पर सुहागा बना हुआ है। रात नौ बजे से रात्रिकालीन कर्फ्यू लागू होने के बाद सड़कें सूनी होते ही बालू के ओवरलोड और अंडरलोड ट्रकों का रेला शहर का सन्नाटा तोड़ देता है। खाली सड़कें इनकी रफ्तार को और परवान चढ़ा रही हैं। इधर, खदानों में एक साथ सैकड़ों ट्रकों के चालक, परिचालक और खदान कर्मियों का जमघट लगने से कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन हो रहा है। इनमें ज्यादातर लोग मास्क नहीं पहने रहते हैं और न ही दो गज दूरी का ही पालन होता है।
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लखनऊ की कमान संभालने से बालू कारोबारियों की चांदी
बांदा। प्रदेश की खनिज निदेशक डॉ. रोशन जैकब को लखनऊ जिलाधिकारी पद का अतिरिक्त कार्यभार संभालने के बाद से बालू खदानों और ओवरलोड ट्रकों का औचक निरीक्षण व आकस्मिक छापा मारने आदि की गतिविधियां ठप हो गईं, जिससे बालू कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। अब तो इन लोगों ने ओवरलोडिंग व अवैध खनन का कारोबार और तेज कर दिया है। डॉ. रोशन जैकब अक्सर खदानों में रात में पहुंचकर छापे मारतीं थीं। इससे बालू कारोबारियों में खौफ बना रहता था। इधर, कुछ दिनों से आकस्मिक छापे की कार्रवाई बंद है, जिससे बालू माफिया संग विभाग के स्थानीय अफसर, कर्मी भी बेफिक्र हो गए हैं।