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दावेदार हाईटेक, सोशल मीडिया से कर रहे वार

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बांदा। कोरोना की दूसरी तेज लहर के मद्देनजर पंचायत चुनाव के दावेदारों ने भी प्रचार की नई रणनीति अपनाई है। फेसबुक, व्हाट्सएप्प आदि सोशल मीडिया के सहारे अपने हाईटेक प्रचार को परवान चढ़ाने में जुटे हैं। साथ ही यह संदेश भी दे रहे कि उनके एजेंडे में गांव के लिए क्या है।
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कोरोनाकाल में घर-घर जाने के बजाए प्रत्याशियों ने अबकी प्रचार का तरीका बदल दिया है। हर हाथ में स्मार्ट फोन होने का फायदा उठा रहे हैं।
प्रत्याशियों ने इस काम में अपने परिजनों और समर्थकों को भी लगा रखा है, जो सोशल मीडिया में प्रचार के लिए रात-दिन एक किए हैं।
खासकर बुजुर्ग और कम पढ़ी-लिखी महिला प्रत्याशियों के प्रचार की कमान उनके युवा बेटे-बेटी, पति, नाती-पोते आदि संभाले हैं। ग्राम प्रधान, डीडीसी, बीडीसी पदों के हरेक प्रत्याशी अपने तरीके से ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं। लुभावने वादे और नारों से लोगों का मन जीतने की कोशिश कर रहे हैं। कोई गांव को शहर की तरह चमकाने तो कोई गांव में विकास की गंगा बहाने के लंबे-चौड़े दावे सोशल मीडिया में कर रहे हैं।
लुकतरा गांव के रमेश सिंह का कहना है कि प्रत्याशी हो चाहे, मतदाता कोरोना के कहर से हर कोई दूरी बनाए है। न कोई पैर छूने दे रहा, न कोई पीठ ठोंक रहा। मकरी गांव के राजेश कुमार का कहना है कि अब मोबाइल युग है। कोरोना का संकट भी है। ऐसे में सोशल मीडिया प्रचार के लिए अच्छा साधन बन रहा है। गांवों में अब अधिकांश लोग खासकर युवा स्मार्ट फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। महिला डिग्री कालेज की प्रवक्ता डॉ. सबीहा रहमानी ने बताया कि पहले की अपेक्षा अबकी पंचायत चुनाव में काफी अंतर है। कोरोना संक्रमण के बीच लोग मिलने-मिलाने से बचकर हाईटेक प्रचार पर उतर आए हैं। सोशल मीडिया का क्रेज बढ़ा है। गांव की सरकार के लिए युवा ज्यादा मैदान में हैं।
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फोटो परिचय-5- निवर्तमान ग्राम प्रधान रजनी।
6- लालचंद्र खटीक।
तीन दशक से पिता-पुत्री के हाथ गांव की सरकार
2001 में जातिगत आरक्षण के चलते नहीं लड़ सके चुनाव---सब हेड
बदौसा ग्राम पंचायत पर एक ही परिवार का कब्जा
लगातार तीन चुनावों में बाजी मारकर बनाई हैट्रिक
संवाद न्यूज एजेंसी
बदौसा। पिछले तीन दशक से एक ही गांव में पिता-पुत्री के हाथ में है गांव की सरकार। बदौसा ग्राम पंचायत से ग्राम प्रधान पद पर लालचंद्र और उनकी पुत्री रजनी ही ज्यादातर काबिज रहीं।
वर्ष 2001 में जातिगत आरक्षण के चलते यह चुनाव में शिरकत नहीं कर सके। 2001 में बदौसा से रामसनेही सोनकर ग्राम प्रधान बने थे, लेकिन उनका जनता के बीच विश्वास बना रहा। लगातार तीन दशकों तक लालचंद्र और उनकी पुत्री रजनी ने गांव की सरकार को बखूबी चलाया। वर्ष 1984 में ग्राम प्रधान बृजभूषण तिवारी की मौत के बाद 1985 में हुए उप चुनाव में लालचंद्र खटिक बदौसा ग्राम पंचायत से पहली बार ग्राम प्रधान बने। उसके बाद लगातार हुए तीन चुनावों में उन्होंने बाजी मारकर हैट्रिक बनाई।
वर्ष 2001 में हुए जातिगत आरक्षण के चलते उनका पर्चा निरस्त हो गया। वह चुनाव नहीं लड़ सके। इस अवधि में रामसनेही सोनकर ग्राम प्रधान बने। वर्ष 2005 में हुए चुनाव में महिला सीट के चलते लालचंद्र की पुत्री रजनी चुनाव लड़ीं और जीत हासिल की। 2010 में लालचंद्र पुन: विजयी रहे। 2015 में महिला सीट के चलते रजनी पुन: चुनाव लड़ीं और निर्वाचित हुईं। वर्तमान में वह ही निवर्तमान ग्राम प्रधान हैं। इस बार अनुसूचित जाति महिला के लिए सीट आरक्षित है। इस बार भी रजनी बदौसा ग्राम पंचायत से प्रधान पद की प्रत्याशी हैं।
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फोटो परिचय-3- रेखा यादव।
4- स्वर्ण सिंह।
चार लोग निर्विरोध बीडीसी निर्वाचित
बबेरू/मटौंध। ब्लॉक क्षेत्र पंचायत सदस्य में पहली बार भाग्य आजमा रहीं रेखा यादव वार्ड नंबर दो (मरका) से निर्विरोध निर्वाचित घोषित की गईं। इस पद पर दो नामांकन हुए थे। एक पर्चा वापस होने पर रेखा वार्ड से बीडीसी बन गईं। उधर, बड़ोखर खुर्द ब्लॉक क्षेत्र वार्ड 10 (लुकतरा) से विशंभर सिंह, वार्ड 15 (पचनेही) से राजश्री व वार्ड 46 (मटौंध ग्रामीण) से स्वर्ण सिंह को बड़ोखर खुर्द के आरओ ने निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया है। (संवाद)
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गांवों में निकल रहा नाइट कर्फ्यू का दम
अतर्रा। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत चुनाव के चलते नाइट कर्फ्यू का दम निकल रहा है। प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटन होने के साथ पूरी रात गांवों की चौपालें आबाद रहीं। कोई अपने चुनाव चिह्न हेलीकाप्टर तो कोई साइकिल के साथ ग्रामीणों के बीच पहुंचा। किसी ने अमरूद दिखाया तो किसी ने उगता हुआ सूरज दिखाया। घर-घर जाकर कुंडी बजाकर ग्रामीणों से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील भी की। बुधवार को ब्लॉक महुआ और नरैनी पर सभी प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। प्रत्याशियों ने अतर्रा ग्रामीण के मजरे समेत बदौसा, फतेहपुर आदि गांवों में प्रत्याशियों का जमघट लगा रहा। रातभर प्रत्याशियों ने ग्रामीणों के घर-घर जाकर दरवाजा खटखटा कर लोगों को जगाया और अपने पक्ष में चुनाव करने की गुजारिश की। फौजदार का पुरवा के 80 वर्षीय राजा भैया यादव ने बताया कि नाइट कर्फ्यू के बावजूद प्रत्याशी प्रचार कर रहे हैं। दरवाजा खटखटा कर नींद हराम कर देते हैं। उधर, अलग-अलग तरह से प्रत्याशी ग्रामीणों को लुभाने में जुटे हैं। कोई लंच पैकेट बंटवा रहा है तो कोई कपड़े देकर। गांवों की चौपालों में रात के साथ प्रत्याशी और समर्थक रतजगा कर रहे हैं। (संवाद)
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बसपा ने नियुक्त किए वार्डवार चुनाव प्रभारी
बांदा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महत्वपूर्ण समझे जाने वाले जिला पंचायत सदस्य चुनाव में बसपा ने सभी वार्डों से अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए वार्डवार चुनाव प्रभारी नियुक्त किए हैं। जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह वर्मा द्वारा जारी सूची में वार्ड एक से 4 लोगों को चुनाव प्रभारी बनाया गया है। वार्ड दो से दो, वार्ड तीन से चार, चार से तीन, पांच से चार, छह से चार, सात से चार, आठ से तीन, नौ से दो, दस से दो, ग्यारह से चार, बारह से तीन, तेरह से चार, चौदह से तीन, पंद्रह से चार, सोलह से तीन, सत्रह से पांच, अठारह से सात, उन्नीस से दो, बीस से तीन, इक्कीस से चार, बाईस से पांच, तेईस से सात, चौबीस से पांच, पच्चीस से पांच, छब्बीस से पांच, सत्ताईस से तीन, 28 से चार, उन्तीस से तीन और वार्ड तीस से कार्यक र्ताओं को चुनाव प्रभारी नामित किया गया है। यह सभी प्रत्याशियों के चुनाव में उसका सहयोग करेंगे। (संवाद)
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