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गेहूं खरीद सुस्त, महज 3063 क्विंटल खरीद

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बांदा। पहली अप्रैल से खुले खरीद केंद्रों में खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त है। केंद्रों में इक्का-दुक्का किसानों के पहुंचने से बांदा मंडी समिति अब तक लगभग 3063 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई है। यहां विभिन्न एजेंसियाें के नौ खरीद केंद्र खोले गए हैं।
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लक्ष्यविहीन गेहूं खरीद के लिए पूरे जनपद में खोले गए 65 केंद्रों में से आठ केंद्र यहां हैं। इनमें विपणन, पीसीएफ, भारतीय खाद्य निगम व यूपीएसएस के दो-दो व डीसीडीएफ के एक केंद्र हैं। विपणन शाखा में 16 किसानों से 667.50 क्विंटल, भारतीय खाद्य निगम शाखा में 15 किसानों से 1825 क्विंटल, पीसीएफ के केंद्रों में तीन किसानों से 101 क्विंटल, डीसीडीएफ के केंद्र में चार किसानों से 268 और यूपीएसएस के केंद्रों में 8 किसानों से 202 क्विंटल ही खरीद हो सकी है।
इन खुले केंद्रों में कांटा और बारदाने का इंतजाम किया गया है। विपणन शाखा के केंद्र प्रभारी पंकज कुमार ने बताया कि किसान अभी कम संख्या में आ रहे हैं। भारतीय खाद्य निगम शाखा में केंद्र प्रभारी महेश चंद्र राठौर कांटा के साथ खरीद के लिए किसानों का इंतजार करते दिखाई दिए।
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पंजीकरण के लिए लागू हो टोकन सिस्टम
बांदा। किसानों को गेहूं बेचने के लिए लोकवाणी केंद्रों और जन सुविधा केंद्रों में पंजीकरण कराना जरूरी है। ऑनलाइन जिस किसान का पंजीकरण हो जाता है वह गेहूं बेचने के लिए पहुंचता है। जारी गांव के किसान मोनू त्रिवेदी व गंछा के रवि मोहन ने बताया कि खतौनी, खसरा, आधार कार्ड, बैंक की पासबुक आदि साथ लेकर वह केंद्रों में पंजीकरण कराने पहुंचते हैं, लेकिन वहां कभी-कभी साइट न खुलने से परेशान होना पड़ता है। टोकन सिस्टम से खरीद होनी चाहिए। (संवाद)
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खरीद केंद्रों में नहीं दिखीं पॉस मशीनें
बांदा। खरीद केंद्रों में फिलहाल पॉस मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। मंडी समिति में खुले खरीद केंद्रों में कुछ में छाया का भी इंतजाम नहीं है। इससे किसानों को चटख धूप में गेहूं बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि, इसके लिए केंद्र प्रभारियों ने लिखित रूप से छाया का इंतजाम कराने के लिए मंडी सचिव को अवगत कराया है। (संवाद)
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